वनाधिकार पत्र से बद्रिका कमल सिंह बने आत्मनिर्भर कृषक

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Update: 2026-03-19 17:28 GMT
Mahasamund. महासमुंद। पिथौरा विकासखंड के ग्राम सुखीपाली के कृषक बद्रिका कमल सिंह पटेल ने वनाधिकार पत्र मिलने के बाद अपने जीवन और कृषि व्यवसाय में बड़ा बदलाव देखा है। वर्षो से वन भूमि पर कृषि कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले बद्रिका को भूमि पर वैधानिक अधिकार न होने के कारण कई सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था।
वनाधिकार पत्र के माध्यम से वैधानिक पहचान
वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम स्तर पर उनका दावा भरा गया। उपखंड स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा परीक्षण के बाद इसे मंजूरी दी गई और जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने अनुमोदन किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें 2.35 हेक्टेयर भूमि का वनाधिकार पत्र प्रदान किया गया। बद्रिका कमल सिंह ने बताया कि वनाधिकार पत्र मिलने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। अब उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने लगा है, साथ ही सपोर्ट प्राइस और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी मिल रहा है।
सिंचाई और उत्पादन में सुधार
कृषि को और सुदृढ़ बनाने के लिए उन्होंने खेत में बोरवेल खुदवाया, जिससे सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो गई। पानी की उपलब्धता से अब वे दो फसलें लेने में सक्षम हो गए हैं। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।
आधुनिक कृषि उपकरण और आत्मनिर्भरता
आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ ही उन्होंने ट्रैक्टर भी खरीदा, जिससे खेत के काम में सुविधा और आधुनिकता आई। अब वे उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। वनाधिकार पत्र ने उन्हें नई पहचान, स्थायित्व और आत्मसम्मान दिया है। बद्रिका ने कहा कि शासन की इस योजना ने उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाया है। अब वे पूरी तरह आत्मनिर्भर कृषक बन चुके हैं और अपने जीवन में आए इस परिवर्तन पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
शासन की योजना का महत्व
वनाधिकार योजना न केवल जमीन के वैधानिक अधिकार देती है, बल्कि कृषि समर्थन, वित्तीय सहायता और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मदद करती है। बद्रिका का उदाहरण इस बात को स्पष्ट करता है कि वनाधिकार पत्र मिलने से केवल जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलता, बल्कि किसान सशक्त, आत्मनिर्भर और समाज में सम्मानित बनते हैं। शासन और वन अधिकार समिति द्वारा दी गई यह सुविधा ग्रामीण किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक साबित हो रही है।
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