बेबीलॉन टावर आग की चपेट में, 48 लोगों की जान बचाने वाले पुलिसकर्मियों को मिला सम्मान
छग
Raipur. रायपुर। राजधानी के वीआईपी रोड चौक स्थित बेबीलॉन टावर सोमवार की रात आग की भीषण लपटों में घिर गया। रात 9 बजे चौथे और आठवें माले से उठी लपटों ने पूरे कॉम्प्लेक्स में अफरा-तफरी मचा दी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ग्राउंड फ्लोर पर लिफ्ट के समीप बिजली की तारों में शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारियों ने लकड़ी के प्लाई मैं आग पकड़ ली और देखते ही देखते आग दुकानों तक फैल गई। फायर ब्रिगेड की पहली दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन हालात काबू से बाहर होते देख कुल 20 दमकल वाहन तैनात करने पड़े। दुकानों के शटर गैस कटर से काटकर दमकलकर्मी भीतर पहुंचे और घंटों की मशक्कत के बाद रात 1 बजे आग पर काबू पाया। लेकिन कुछ समय बाद ही आग पुनः भड़क उठी, जिसे सुबह 6:30 बजे तक पूरी तरह बुझाया जा सका।
इस दौरान थाना तेलीबांधा प्रभारी नरेंद्र मिश्रा ने अपने स्टाफ के साथ साहस और जज्बे का परिचय दिया। धुएं और लपटों के बीच घुसकर उन्होंने 48 लोगों की जान बचाई। इनमें से 8 लोग लिफ्ट में फंसे हुए थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटनास्थल पर रायपुर कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, एएसपी पश्चिम दौलत राम पोर्ते और सीएसपी कोतवाली केसरी नंदन नायक सहित आला अधिकारी पूरी रात मौजूद रहे। फायर ब्रिगेड के जवानों ने भी जान की परवाह किए बिना लगातार घंटों तक जूझते हुए हालात काबू में किए।
आज 3 सितंबर को रायपुर कलेक्टर एवं एसएसपी ने थाना प्रभारी नरेंद्र मिश्रा, प्रधान आरक्षक तरुण यादव, रामनारायण पटेल, आरक्षक जानकी शरण, चंद्रवंशी आलोक बंछोर, नकुल जगत और हेमलाल को सम्मानित किया। इन बहादुर जवानों को शाल, बुके और “मेरा भारत, अमर भारत” पुस्तक भेंटकर प्रशासन ने उनके साहसिक कार्य की सराहना की। यह हादसा शहर की ऊँची इमारतों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों शॉर्ट सर्किट जैसी मूलभूत लापरवाहियों को नजरअंदाज किया गया? अब यह जांच का विषय है।