दीपका खदान में हेवी ब्लास्टिंग से ग्रामीण की मौत, SECL प्रबंधन पर गंभीर आरोप

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Update: 2026-01-07 13:43 GMT
Korba. कोरबा। कोयला उत्पादन की अंधी होड़ में मानवीय सुरक्षा को नजरअंदाज किए जाने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। बुधवार दोपहर एसईसीएल की दीपका कोयला खदान के सुआभोड़ी फेस पर हुई भीषण ब्लास्टिंग ने एक निर्दोष ग्रामीण की जान ले ली। अमानक और लापरवाह तरीके से की गई हेवी ब्लास्टिंग के दौरान उड़े पत्थरों की चपेट में आकर ग्राम रेकी निवासी लखन पटेल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है और एसईसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब खदान में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के भारी ब्लास्टिंग की जा रही थी। आरोप है कि ब्लास्टिंग से पहले न तो निर्धारित सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही खदान के समीप स्थित सार्वजनिक सड़क पर आवाजाही रोकने की व्यवस्था की गई। इसी दौरान सड़क से गुजर रहे लखन पटेल पर एक विशाल पत्थर आ गिरा, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो यह जानलेवा हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि खदान प्रबंधन बार-बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहा है और इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

इस घटना पर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस हादसे को “दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या” करार दिया। उनका कहना है कि रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक मार्गों के पास बिना पर्याप्त घेराबंदी और चेतावनी के ब्लास्टिंग कराना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, जबकि सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। समिति की ओर से मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए कड़ी मांगें रखी गई हैं। अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा कि खान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और आपराधिक कार्रवाई हो। इसके साथ ही मृतक लखन पटेल के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है। समिति ने यह भी मांग की है कि परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुसार एसईसीएल में स्थायी रोजगार दिया जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।

इसके अलावा, भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ब्लास्टिंग प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की गई है। समिति का कहना है कि जब तक खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे। ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन और प्रशासन ने शीघ्र ही इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। फिलहाल ग्रामीणों में भारी आक्रोश को देखते हुए क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। कई ग्रामीण संगठनों ने सुआभोड़ी फेस में तत्काल काम बंद करने की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोयला उत्पादन के आगे इंसानी जान की कोई कीमत नहीं रह गई है? प्रशासन और प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।
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