Bastar. बस्तर। बस्तर जिले में तेंदुए के दिखाई देने का दावा करता एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को केसलुर क्षेत्र के खंडियापाल–सोसनपाल इलाके का बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि बीती रात स्थानीय ग्रामीणों ने तेंदुए को देखा और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसके बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे बस्तर जिले में तेंदुए की मौजूदगी से जोड़कर देख रहे हैं और आशंका जता रहे हैं कि वन्यजीव आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहा है। हालांकि, वन विभाग ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए वीडियो को भ्रामक बताया है और वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में बस्तर जिले में तेंदुए की किसी भी प्रकार की गतिविधि या मूवमेंट दर्ज नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे तेंदुए का व्यवहार उसके स्वाभाविक स्वभाव से मेल नहीं खाता। वीडियो में तेंदुआ जिस तरह बैठकर कराहता या आवाज निकालता दिखाई दे रहा है, वह सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं होता। इस संबंध में बस्तर वन मंडल के डीएफओ उत्तम गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि वायरल वीडियो बस्तर जिले का नहीं है। उन्होंने बताया कि तेंदुआ स्वभाव से बेहद फुर्तीला और सतर्क जानवर होता है, जो आमतौर पर इस तरह खुले में बैठकर कराहता या दहाड़ता नहीं है। वीडियो को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि तेंदुआ किसी जगह फंसा हुआ है, संभवतः किसी तार, जाल या अन्य अवरोध में।
डीएफओ ने आशंका जताई कि यह वीडियो किसी अन्य क्षेत्र या पुराने मामले का हो सकता है, जिसे गलत तरीके से बस्तर जिले से जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के इस तरह के वीडियो तेजी से फैल जाते हैं, जिससे आम लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम की स्थिति पैदा होती है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि वास्तव में किसी क्षेत्र में तेंदुए या अन्य खतरनाक वन्यजीव की मौजूदगी होती, तो विभाग द्वारा तत्काल अलर्ट जारी किया जाता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते। फिलहाल बस्तर जिले में तेंदुए की मौजूदगी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और वायरल वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, वन्यजीव के दिखने या आपात स्थिति में सीधे वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते सही कार्रवाई की जा सके और अनावश्यक दहशत का माहौल न बने।