Mahasamund. महासमुंद। जनपद पंचायत महासमुंद में आज आवारा कुत्तों के प्रबंधन और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनपद स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के प्रभावी पालन को लेकर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग, पशुधन विकास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले में आवारा कुत्तों के उचित प्रबंधन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देशित करना था। अधिकारियों को बताया गया कि स्कूल, खेल परिसर, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए फेंसिंग, गेट और नियमित निगरानी अनिवार्य है।
कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया कि यदि किसी क्षेत्र में आवारा कुत्ते पाए जाते हैं, तो उन्हें पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 के अनुसार हटाना होगा। इसके तहत कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी करने के बाद आश्रय स्थलों में शिफ्ट किया जाएगा और उन्हें वापस उसी क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आवारा कुत्तों का संपूर्ण डेटा संधारित करना अनिवार्य है, ताकि जिले में उनकी निगरानी और प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करने के महत्व को बताया। कार्यशाला में हाट-बाजारों में अपशिष्ट प्रबंधन, नियमित निरीक्षण व्यवस्था और हेल्पलाइन नंबर 1100 पर प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि माननीय न्यायालय द्वारा आवारा कुत्तों के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उपस्थित अधिकारियों ने इस कार्यशाला में उठाए गए सभी निर्देशों को अपने संबंधित क्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया। पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझाया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के व्यवहार, संख्या और उनके प्रबंधन की निगरानी के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके तहत आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया को नियमित रूप से रिकॉर्ड करना अनिवार्य है।
कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण का लक्ष्य केवल जनसुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और कल्याण को भी बनाए रखना है। अधिकारी और पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया कि किसी भी कुत्ते को चोट या बीमारी की स्थिति में उचित उपचार मुहैया कराना अनिवार्य है। जनपद स्तरीय इस कार्यशाला के आयोजन से अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ी है। जिला प्रशासन का यह प्रयास आवारा कुत्तों के नियंत्रण और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।