रायपुर में 65 नए आंगनबाड़ी भवन तैयार, दीवारों पर शिक्षा सामग्री से बन रहा सीखने का माहौल
छग
Raipur. रायपुर। जिले में बच्चों को सुरक्षित, सुविधायुक्त और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवीन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में आवश्यक आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार कर भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई थी। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 71 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की मंजूरी दी गई थी, जिनमें से अब तक 65 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष भवनों का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगतिरत है। प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी स्वीकृत भवनों को शीघ्र पूर्ण कर बच्चों और माताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इन नए आंगनबाड़ी भवनों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। भवनों की दीवारों पर शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक सामग्री अंकित की गई है, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीख सकें। इनमें अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, फलों के नाम, महीनों के नाम, प्रमुख त्योहारों की जानकारी, मौसम संबंधी कविताएं और अन्य उपयोगी शिक्षण सामग्री शामिल है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाना और उन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही शिक्षा के प्रति आकर्षित करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण से बच्चों के साथ-साथ माताओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे पोषण और शिक्षा दोनों स्तरों पर सुधार देखा जा रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत किए जा रहे इस कार्य से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं, बल्कि सामाजिक आधारभूत संरचना भी मजबूत हुई है। आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आंगनबाड़ी भवनों को केवल देखभाल केंद्र ही नहीं बल्कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव के रूप में विकसित किया जा रहा है। दीवारों पर बनाई गई शिक्षाप्रद सामग्री बच्चों के मानसिक विकास में सहायक साबित हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में सभी शेष भवनों का निर्माण कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा और सभी केंद्रों को समान रूप से सुविधायुक्त बनाया जाएगा। इससे जिले में प्रारंभिक बाल शिक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत होगी। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और छोटे बच्चों को घर जैसे माहौल में सीखने का अवसर मिल रहा है।