50 किसानों ने आधुनिक तकनीक से सीखा मधुमक्खी पालन

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Update: 2026-03-25 12:54 GMT
Sarangarh Bilaigarh. सारंगढ़ बिलाईगढ़। सारंगढ़ बिलाईगढ़ में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत आयोजित 7 दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यक्रम 19 मार्च से 25 मार्च तक स्थानीय धर्मशाला में आयोजित किया गया था, जिसमें जिले के 50 पुरुष और महिला किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना और उन्हें आय के नए स्रोत से जोड़ना था। प्रशिक्षण में किसानों को मधुमक्खी पालन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई, जैसे कि मधुमक्खियों के प्रकार, छत्ता निर्माण, शहद निकालने की तकनीक, रोगों से बचाव और बाजार में शहद की बिक्री। इसके अलावा, किसानों को यह भी समझाया गया कि किस प्रकार सरसों और अन्य फसलों के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़कर उनकी उत्पादन क्षमता और आय बढ़ाई जा सकती है। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने किसानों को व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से मधुमक्खियों की देखभाल, उनकी प्रजनन तकनीक और शहद की गुणवत्ता बनाए रखने के तरीकों का भी प्रशिक्षण दिया।

समापन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय और कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र और पपीते के पौधे वितरित किए, जिससे उनकी मेहनत और प्रयास की सराहना हुई। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि सारंगढ़ जिले में सरसों की खेती अधिक मात्रा में होती है और इसी कारण मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मधुमक्खियों की सहायता से फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर उमेश कुमार साहू, कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से किसानों को न केवल मधुमक्खी पालन की तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी में मधुमक्खियों की भूमिका के महत्व को भी समझने का अवसर मिला। किसानों ने प्रशिक्षण में सीखी गई।

तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने की उत्सुकता दिखाई और बताया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए आय का नया स्रोत साबित होगा। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। मधुमक्खी पालन न केवल आय का स्रोत है बल्कि यह कृषि उत्पादों के परागण में भी मदद करता है, जिससे फसलों की उपज और गुणवत्ता में सुधार होता है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक और उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान छत्तों की सही देखभाल, रोग-प्रतिरोधक तकनीक, और शहद संग्रहण की प्रक्रियाओं को समझा। इसके अलावा, किसानों को यह भी जानकारी दी गई कि किस प्रकार मधुमक्खी पालन से उनके खेती के पारिस्थितिकी संतुलन में सुधार होगा। सारंगढ़ में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि किसान नई तकनीकों को अपनाने और मधुमक्खी पालन जैसे अतिरिक्त आय स्रोत को अपनाने के लिए तैयार हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि भविष्य में वे मधुमक्खी पालन को अपने व्यवसाय का एक स्थायी हिस्सा बनाएंगे। इस प्रकार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ।
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