दुर्ग जिले में 4.97 लाख टन धान खरीदी, किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये का भुगतान

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Update: 2026-01-27 17:10 GMT
Durg. दुर्ग। राज्य सरकार की सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी नीतियों के चलते दुर्ग जिले में इस वर्ष धान खरीदी अभियान में तेज गति देखी जा रही है। जिले के उपार्जन केन्द्रों में अब तक 4,97,037.36 मे. टन धान खरीदी जा चुकी है। किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होने के कारण उनकी प्रसन्नता देखने को मिल रही है। जिले में पंजीकृत कुल 1,13,623 किसानों में से अब तक 98,472 किसान अपनी उपज बेच चुके हैं। इस दौरान किसानों को कुल 1,06,648.65 लाख रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया है। किसानों के लिए समय पर वाजिब दाम मिलने और भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी होने से किसान न केवल खुश हैं, बल्कि अधिक संख्या में अपने धान बेचने केन्द्रों पर पहुंच रहे हैं।

धान उठाव की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। अब तक उपार्जन केन्द्रों से 1,81,378.50 मे. टन धान का उठाव किया जा चुका है। उठाव हेतु कुल 2,94,997.14 मे. टन धान के डीओ/टीओ जारी किए गए हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि किसानों की उपज समय पर केन्द्रों से उठाई जाए और बाजार में बिचौलियों का हस्तक्षेप न्यूनतम हो। किसानों की सहभागिता से रकबा समर्पण की प्रक्रिया भी प्रभावी ढंग से चल रही है। अब तक 60,424 किसानों ने कुल 2,715.43 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है। इससे न केवल खरीदी और भुगतान में पारदर्शिता बनी है, बल्कि किसानों को भी अपनी उपज का उचित लाभ सुनिश्चित हो रहा है। जिले में कुल 87 सहकारी समितियों के 102 उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने वाले किसानों की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं।

बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक केन्द्र में अब तक 16,78,647 बारदाने उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही उपार्जन केन्द्रों में भौतिक सत्यापन, टोकन प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। जिला प्रशासन ने किसानों को यह सुनिश्चित किया कि खरीदी और रकबा समर्पण की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। किसान अपने निर्धारित समय पर उपज बेचकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की इस पारदर्शी व्यवस्था से न केवल किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है, बल्कि राज्य में धान खरीदी के अभियान में आम किसान की भागीदारी भी बढ़ी है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले 3 दिनों में दुर्ग जिले में लगभग 1.5 लाख किसान अपने उपज धान बेचने उपार्जन केन्द्रों पर पहुंचेंगे। इस प्रकार राज्य सरकार की नीति से किसान संतुष्ट और लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि धान खरीदी का कार्य पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा है।
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