रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्कूली विद्यार्थियों की अपार आईडी (APAAR ID) बनाने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षा विभाग की ओर से लगभग 20 दिन पहले स्कूलों को तीन दिनों के भीतर लंबित आईडी तैयार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद जिले में 16 हजार से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी बनना बाकी है। सबसे ज्यादा लंबित मामले निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग ने अब लंबित मामलों को निपटाने के लिए स्कूल स्तर पर विशेष शिविर लगाने की तैयारी की है। इन शिविरों में विद्यार्थियों और अभिभावकों की आवश्यक जानकारी का सत्यापन कर अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
तीन दिन का अल्टीमेटम बीता, फिर भी हजारों आईडी अधूरी
रायपुर जिला शिक्षा कार्यालय ने 6 अक्टूबर 2026 को स्कूलों को लंबित अपार आईडी तैयार करने के निर्देश जारी किए थे। उस समय 54,180 विद्यार्थियों की आईडी बनाने का काम बाकी बताया गया था। विभाग ने संबंधित स्कूलों को तीन दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी सभी विद्यार्थियों की आईडी तैयार नहीं हो सकी है। ताजा उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में 16 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की अपार आईडी अब भी लंबित हैं। हालांकि, पहले की तुलना में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की आईडी बनाने का काम आगे बढ़ा है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
निजी स्कूलों में सबसे ज्यादा अपार आईडी पेंडिंग
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि लंबित अपार आईडी में निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। निजी स्कूलों में प्रक्रिया धीमी होने के कारण विभाग ने स्कूल प्रबंधनों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के लिए अपार आईडी तैयार करना महत्वपूर्ण है। स्कूलों से विद्यार्थियों की जानकारी का सत्यापन पूरा कराने और लंबित मामलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है।
स्कूलों में शिविर लगाकर बनाई जाएगी APAAR ID
समग्र शिक्षा के अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि लंबित विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार करने के लिए स्कूल स्तर पर प्रक्रिया तेज की जा रही है। यदि निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो प्रशासन और शिक्षा विभाग की टीमें संबंधित स्कूलों में विशेष शिविर आयोजित करेंगी। इन शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों के रिकॉर्ड, आवश्यक जानकारियों और अभिभावकों की सहमति संबंधी प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य तकनीकी या रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं को दूर कर आईडी बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
अपार आईडी और विद्यार्थियों को ये फायदा 
अपार यानी Automated Permanent Academic Account Registry विद्यार्थियों के लिए तैयार की जाने वाली 12 अंकों की विशिष्ट शैक्षणिक पहचान है। यह केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल का हिस्सा है। इसके जरिए विद्यार्थियों की अंकसूची, प्रमाणपत्र, शैक्षणिक क्रेडिट और अन्य उपलब्धियों को डिजिटल माध्यम से व्यवस्थित करने में सहायता मिलती है। अपार आईडी को डिजिलॉकर से जोड़ा जाता है, जिससे विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप से प्राप्त करने और उनकी जानकारी सत्यापित कराने में सुविधा होती है।
स्कूल बदलने और उच्च शिक्षा में मिलेगी सुविधा
अपार आईडी का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ना है। यदि विद्यार्थी एक स्कूल से दूसरे स्कूल में प्रवेश लेता है या उच्च शिक्षा के लिए किसी अन्य संस्थान में जाता है, तो उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है। इससे प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक उपलब्धियों के सत्यापन और क्रेडिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
APAAR ID नहीं बनने पर क्या होगा?
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि अपार आईडी बनने से विद्यार्थियों को भविष्य में शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटल सत्यापन में सुविधा होगी। आईडी नहीं होने पर कुछ डिजिटल प्रक्रियाओं में अतिरिक्त दस्तावेज या सत्यापन की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अपार आईडी नहीं बनने का अर्थ यह नहीं है कि विद्यार्थी को स्कूल की पढ़ाई, बोर्ड परीक्षा या हर प्रकार की छात्रवृत्ति से स्वतः वंचित कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अपार आईडी बनाना सहमति आधारित प्रक्रिया है और केवल आईडी नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
अभिभावक कैसे बनवा सकते हैं बच्चे की अपार आईडी?
अपार आईडी बनाने के लिए अभिभावक अपने बच्चे के स्कूल से संपर्क कर सकते हैं। स्कूल में विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है। नाबालिग विद्यार्थियों के मामले में अभिभावक की सहमति आवश्यक है। स्कूल रिकॉर्ड और आधार में नाम जैसी जानकारी का मिलान होना चाहिए। रिकॉर्ड में अंतर होने पर पहले आवश्यक सुधार करना पड़ सकता है। सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थी की अपार आईडी तैयार होती है, जिसे डिजिलॉकर में देखा जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया तेज करने के दिए निर्देश
रायपुर में बड़ी संख्या में अपार आईडी लंबित होने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधनों को आवश्यक जानकारी का सत्यापन और आईडी निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। विशेष शिविरों के माध्यम से लंबित मामलों का समाधान करने की तैयारी है। अभिभावकों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे स्कूलों के साथ समन्वय बनाकर अपने बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड की सही जानकारी उपलब्ध कराएं। अपार आईडी के जरिए विद्यार्थियों को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान मिलेगी, जिससे भविष्य में उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का प्रबंधन और सत्यापन अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
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