पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि वर्तमान डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। यदि हम एआई और आधुनिक तकनीकों को अपनाने में पीछे रहेंगे तो विकास की दौड़ में भी पिछड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 20-25 वर्ष पहले कंप्यूटर तकनीक को लेकर लोगों के बीच सीमित समझ थी, लेकिन आज कंप्यूटर हर क्षेत्र की जरूरत बन चुका है, उसी तरह आने वाले समय में एआई शासन, प्रशासन और विकास योजनाओं का महत्वपूर्ण आधार बनने वाला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग सरकार की नीतियों के निर्माण, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और आम जनता तक सुविधाएं पहुंचाने में प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने इसे विकास की गति बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण बताते हुए कहा कि सरकार को बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में प्रशासनिक व्यवस्था को भी नई तकनीकों से जोड़ना जरूरी है। एआई की मदद से बड़े पैमाने पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे योजनाओं को अधिक प्रभावी और जरूरत के अनुसार तैयार करने में सहायता मिलेगी। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र विशेष में लोगों की आवश्यकताएं क्या हैं और किस प्रकार संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। योजनाओं की निगरानी, संसाधनों का प्रबंधन, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए।
उन्होंने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज से कुछ दशक पहले कंप्यूटर को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं थीं। उस समय बहुत कम लोग इसकी उपयोगिता को समझते थे, लेकिन धीरे-धीरे कंप्यूटर शिक्षा, व्यापार, प्रशासन और उद्योग सहित हर क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बन गया। इसी तरह एआई भी भविष्य की जरूरत है और इसे अपनाने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग आम लोगों के हित में किया जाए। डिजिटल माध्यमों से सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाया जा सकता है। एआई के उपयोग से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और योजनाओं के प्रभावी संचालन में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार जैसे क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव संभव हैं। कृषि क्षेत्र में एआई आधारित तकनीकों से किसानों को मौसम, फसल और बाजार से जुड़ी बेहतर जानकारी मिल सकती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारी की पहचान और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों और व्यक्तिगत सीखने की तकनीकों के माध्यम से छात्रों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और युवाओं से भी नई तकनीकों को सीखने और अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय तकनीक आधारित विकास का है और जो समाज तथा संस्थाएं समय के साथ बदलाव स्वीकार करेंगी, वही आगे बढ़ पाएंगी। उन्होंने कहा कि एआई को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इसके सकारात्मक उपयोग को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। एआई का उपयोग पारदर्शिता, सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। सरकार का उद्देश्य ऐसी तकनीक को बढ़ावा देना है, जिससे आम नागरिकों का जीवन आसान हो और प्रशासन अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान को डिजिटल शासन और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आने वाले वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास मॉडल को बदलने की क्षमता रखता है। ऐसे में सरकारों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे तकनीक आधारित समाधान अपनाकर विकास की गति को तेज करें।
उन्होंने कहा कि एआई भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि विकास का अवसर है। इसका सही उपयोग कर देश और राज्य नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। डिजिटल युग में तकनीकी क्षमता को मजबूत करना ही तेज और समावेशी विकास की कुंजी है।