गो डिजिट इंश्योरेंस पर फैसला, नवादा केस में राहत

Update: 2026-07-03 12:05 GMT

Bihar: नवादा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सड़क हादसे में पति को खो चुकी महिला के पक्ष में बड़ा आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी ‘गो डिजिट’ जनरल इंश्योरेंस को निर्देश दिया है कि वह मृतक की पत्नी को 15 लाख रुपये की बीमित राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही 30 हजार रुपये मानसिक और आर्थिक क्षति के रूप में तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का भी आदेश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो निर्धारित दर से ब्याज भी देना होगा।

यह मामला वर्ष 2023 के एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़ा है। 21 दिसंबर की सुबह करीब 4 बजे 27 वर्षीय रौशन कुमार अपनी स्कॉर्पियो से पांच दोस्तों के साथ बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे। इसी दौरान रजौली–सिरदला मार्ग (एसएच-70) पर बैरियामोड़ के पास नीलगायों का झुंड अचानक सड़क पर आ गया। जानवरों को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गया। इस हादसे में रौशन कुमार और उनके दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

पति की मौत के बाद उनकी पत्नी कुमारी देवी ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया था, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मृतक का ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी आधार पर बीमा भुगतान से इंकार कर दिया गया।

इसके बाद कुमारी देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग में मामला दायर किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने रजौली थाना में दर्ज सन्हा को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें यह उल्लेख था कि दुर्घटना के बाद घटनास्थल से कुछ सामान गायब हुआ था और उसमें मृतक का ड्राइविंग लाइसेंस भी शामिल था। आयोग ने सभी दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड की जांच के बाद माना कि केवल लाइसेंस की मूल प्रति न मिलने से यह नहीं कहा जा सकता कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था।

आयोग ने बीमा कंपनी के इस तर्क को खारिज करते हुए इसे ‘सेवा में कमी’ माना। आयोग ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर वैध बीमा दावे को अस्वीकार करना उचित नहीं है। यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि बीमा कंपनियां केवल औपचारिक कारणों के आधार पर क्लेम को खारिज नहीं कर सकतीं, बल्कि वास्तविक तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता देनी होगी। यह निर्णय न केवल नवादा बल्कि पूरे बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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