पीरपैंती। पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बगीचे में आपस में लड़ रहे दो भारी-भरकम सांड अचानक खुले और गहरे कुएं में जा गिरे। कुएं की गहराई अधिक होने के कारण दोनों सांड पानी और कीचड़ के बीच फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। बाद में प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों की टीमों को इसकी सूचना दी गई।

जानकारी के अनुसार लक्ष्मीपुर गांव के एक बगीचे में दो सांड आपस में लड़ रहे थे। लड़ते-लड़ते दोनों बगीचे में मौजूद खुले कुएं के पास पहुंच गए। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से दोनों सांड एक साथ कुएं में जा गिरे।

अचानक हुई घटना को देखकर आसपास मौजूद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कुआं काफी गहरा होने और उसके अंदर पानी तथा कीचड़ होने के कारण ग्रामीणों के लिए दोनों सांडों को अपने स्तर पर बाहर निकालना आसान नहीं था।

कुएं में गिरने के बाद दोनों सांड पानी और कीचड़ के बीच फंस गए। भारी वजन और कुएं की गहराई के कारण रस्सी के सहारे सामान्य तरीके से उन्हें निकालना मुश्किल था। ऐसे में ग्रामीणों ने तत्काल प्रशासन से मदद लेने का फैसला किया।

घटना की सूचना पीरपैंती थाना पुलिस के साथ प्रखंड और अंचल प्रशासन को दी गई। मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य की तैयारी शुरू कर दी।

स्थानीय विधायक मुरारी पासवान भी घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे। उनके साथ अंचलाधिकारी चंद्रशेखर कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिमन्यु कुमार और थानाध्यक्ष पंकज कुमार राउत भी पुलिस बल तथा अन्य कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले कुएं की स्थिति और उसमें फंसे दोनों सांडों की स्थिति का जायजा लिया। कुआं गहरा होने के कारण बचाव अभियान में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत थी।

सांडों का वजन अधिक होने के कारण उन्हें सामान्य तरीके से बाहर निकालने में जोखिम था। गलत तरीके से रस्सी बांधने या अचानक खींचने पर पशुओं को चोट लगने की आशंका भी थी। इसे देखते हुए राहत अभियान में विभिन्न विभागों की मदद ली गई।

प्रशासन ने वन विभाग और पशुपालन विभाग को भी घटना की सूचना दी। पशुओं को सुरक्षित निकालने और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए पशुपालन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

इसके अलावा अग्निशमन दल को भी राहत एवं बचाव कार्य के लिए अलर्ट किया गया। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जमा हो गए। लोग कुएं में फंसे सांडों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास को देखते रहे।

राहत अभियान की सबसे बड़ी चुनौती दोनों सांडों का भारी वजन था। कुएं की गहराई और सीमित जगह के कारण किसी व्यक्ति के नीचे उतरकर सामान्य तरीके से पशुओं को बाहर निकालना मुश्किल था।

इसके बाद तकनीकी मदद लेने का निर्णय लिया गया। अदाणी पावर के कर्मियों को घटना की जानकारी दी गई। कर्मी हाइड्रा क्रेन लेकर घटनास्थल पर पहुंचे, ताकि भारी-भरकम सांडों को सुरक्षित तरीके से ऊपर खींचा जा सके।

हाइड्रा क्रेन के पहुंचने के बाद बचाव अभियान को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया। पशुओं को चोट न पहुंचे, इसके लिए सावधानी के साथ रस्सियों और अन्य जरूरी साधनों की व्यवस्था की गई।

कुएं के आसपास मौजूद लोगों को भी सुरक्षित दूरी पर रखा गया। भारी मशीन से बचाव कार्य होने के कारण किसी प्रकार की दूसरी दुर्घटना न हो, इसके लिए प्रशासन और पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभाली।

दोनों सांडों के कुएं में गिरने की खबर आसपास के इलाकों में भी फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। ग्रामीणों की भीड़ के बीच पुलिस कर्मियों ने बचाव कार्य के लिए पर्याप्त जगह बनाए रखने का प्रयास किया।

घटना में ग्रामीणों की तत्परता भी देखने को मिली। सांडों के कुएं में गिरने के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर स्थिति संभाली और समय गंवाए बिना प्रशासन को सूचना दी।

इसके बाद अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बनाकर राहत अभियान शुरू किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, वन विभाग, पशुपालन विभाग और अग्निशमन दल को राहत कार्य से जोड़ा गया।

हाइड्रा क्रेन उपलब्ध होने से बचाव अभियान में तकनीकी सहायता मिली। भारी पशुओं को गहरे कुएं से बाहर निकालने के लिए क्रेन जैसे उपकरण की आवश्यकता थी।

बगीचे में मौजूद खुला कुआं भी घटना के बाद चर्चा का विषय बन गया। खुले कुओं के आसपास सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर पशुओं के साथ-साथ लोगों के गिरने का खतरा भी बना रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर पुराने और गहरे कुएं मौजूद होते हैं। इनमें से कुछ का इस्तेमाल नहीं होने के बावजूद वे खुले रहते हैं। ऐसे स्थानों पर पशुओं के घूमने के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

लक्ष्मीपुर गांव की घटना में भी दोनों सांड आपस में लड़ते हुए कुएं के पास पहुंच गए और अचानक उसमें गिर गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि उन्हें रोकने का मौका नहीं मिल सका।

कुएं में पानी और कीचड़ होने से सांडों के लिए बाहर निकलना संभव नहीं था। कुएं की दीवारें और गहराई उनके लिए बड़ी बाधा बनी रहीं। ऐसे में बाहरी मदद के बिना उन्हें बाहर निकालना मुश्किल था।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में राहत कार्य चलाया गया। पशुओं को सुरक्षित निकालने के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति का भी ध्यान रखा गया, ताकि बचाव के दौरान उन्हें अतिरिक्त चोट न पहुंचे।

इस पूरे अभियान में अलग-अलग विभागों और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। घटना की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों और राहत टीमों के मौके पर पहुंचने से बचाव कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिली।

स्थानीय विधायक मुरारी पासवान भी मौके पर मौजूद रहे और राहत कार्य की जानकारी लेते रहे। सीओ चंद्रशेखर कुमार, बीडीओ अभिमन्यु कुमार और थानाध्यक्ष पंकज कुमार राउत ने संबंधित टीमों के साथ मिलकर बचाव व्यवस्था संभाली।

अदाणी पावर के कर्मियों की ओर से उपलब्ध कराई गई हाइड्रा क्रेन के जरिए गहरे कुएं में फंसे भारी-भरकम सांडों को निकालने का अभियान चलाया गया।

घटना ने खुले कुओं की सुरक्षा को लेकर भी लोगों का ध्यान खींचा है। ऐसे कुओं के चारों तरफ मजबूत घेराबंदी या सुरक्षा व्यवस्था होने से इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

लक्ष्मीपुर गांव में दो सांडों के गहरे कुएं में गिरने की इस घटना के बाद ग्रामीणों और प्रशासन की सक्रियता से राहत अभियान शुरू किया गया। कई विभागों और तकनीकी टीम की मदद से दोनों पशुओं को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए गए।

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