गोरखपुर। गोरखपुर कैंट-उनौला रेलखंड के पैच दोहरीकरण कार्य की कमीशनिंग के चलते पूर्वोत्तर रेलवे के इस महत्वपूर्ण रूट पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य और रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) के निरीक्षण को देखते हुए रेलवे ने कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। यात्रियों की सुविधा और रेल यातायात को सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए रेलवे ने ट्रेनों को रद्द करने, मार्ग बदलने, पुनर्निर्धारित करने और रास्ते में नियंत्रित करने का निर्णय लिया है।

रेलवे के अनुसार, यह बदलाव 31 अगस्त से 4 सितंबर तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान तीन सवारी गाड़ियों को रद्द किया जाएगा, जबकि 13 एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग के बजाय परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा सात ट्रेनों को निर्धारित समय से अलग समय पर चलाया जाएगा। चार ट्रेनों को रास्ते में कुछ समय के लिए नियंत्रित भी किया जाएगा।

दोहरीकरण कार्य की कमीशनिंग महत्वपूर्ण

गोरखपुर कैंट-उनौला के बीच पैच दोहरीकरण का काम रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलखंड के दोहरीकरण से भविष्य में ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने और एक ही ट्रैक पर ट्रेनों के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दोहरीकरण के बाद नए रेलखंड को मौजूदा परिचालन व्यवस्था से जोड़ने के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जाता है। इस प्रक्रिया में सिग्नल, ट्रैक और अन्य परिचालन प्रणालियों को नई व्यवस्था के अनुरूप जोड़ा और जांचा जाता है। इसी वजह से कुछ समय के लिए सामान्य ट्रेन संचालन प्रभावित होता है।

31 अगस्त से 4 सितंबर तक असर

रेलवे द्वारा जारी परिचालन बदलावों के मुताबिक, 31 अगस्त से 4 सितंबर तक इस रेलखंड से गुजरने वाली कई ट्रेनों की समय-सारिणी प्रभावित होगी। तीन सवारी गाड़ियों को पूरी तरह रद्द किया जाएगा।

इसके साथ ही 13 एक्सप्रेस ट्रेनों को बदले हुए मार्ग से संचालित किया जाएगा। इससे इन ट्रेनों के यात्रा समय में बदलाव होने की संभावना है। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करनी होगी।

रेलवे ने सात ट्रेनों को भी पुनर्निर्धारित समय पर चलाने का फैसला किया है। इनमें कुछ ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 60 मिनट से लेकर पांच घंटे तक देरी से रवाना होंगी।

चार ट्रेनों को रास्ते में किया जाएगा नियंत्रित

परिचालन व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार ट्रेनों को रास्ते में भी नियंत्रित किया जाएगा। इन ट्रेनों को अलग-अलग स्थानों पर 30 से 60 मिनट तक रोका या नियंत्रित किया जा सकता है।

रेलवे के इस निर्णय का उद्देश्य नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान ट्रेनों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना है। कार्य पूरा होने तक ट्रेनों को नियंत्रित करने से यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है, लेकिन इससे परिचालन सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कई प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है

परिचालन में बदलाव का असर गोरखपुर और आसपास के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है। गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, सीवान और देवरिया सदर जैसे प्रमुख स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

जो यात्री रद्द या परिवर्तित मार्ग वाली ट्रेनों से यात्रा करने वाले हैं, उन्हें यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति और संशोधित समय की जानकारी हासिल करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन के नए मार्ग और प्रस्थान समय की जानकारी रखना जरूरी होगा।

यात्रियों को पहले जानकारी लेने की सलाह

रेलवे के परिचालन बदलावों के कारण यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी गई है। जिन यात्रियों की ट्रेन पुनर्निर्धारित है, उन्हें संशोधित प्रस्थान समय के अनुसार यात्रा की योजना बनानी होगी।

इसी तरह बदले मार्ग से चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों को यह देखना होगा कि उनकी ट्रेन किन स्टेशनों से होकर जाएगी। इससे यात्रा की अवधि और कुछ स्टेशनों पर पहुंचने के समय में बदलाव हो सकता है।

रेलवे के लिए यह भी चुनौती होगी कि निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को पर्याप्त सूचना उपलब्ध कराई जाए, ताकि स्टेशन पर अचानक भीड़ या भ्रम की स्थिति न बने।

भविष्य में परिचालन को मिलेगा फायदा

हालांकि दोहरीकरण कार्य के कारण कुछ दिनों तक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद इसके दीर्घकालिक फायदे मिलने की उम्मीद है। दोहरी लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे चलाने के बजाय अलग-अलग ट्रैक पर संचालित करना आसान होगा।

इससे रेलखंड की क्षमता बढ़ सकती है और भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की संभावना भी मजबूत होगी। साथ ही ट्रेनों के समय पर संचालन में सुधार और परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

रेल संरक्षा आयुक्त का निरीक्षण भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण चरण है। CRS निरीक्षण के दौरान नए या बदले गए रेलखंड की संरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जाती है। निरीक्षण और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद नए दोहरीकृत हिस्से को नियमित परिचालन के लिए इस्तेमाल करने का रास्ता साफ होगा।

यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी

31 अगस्त से 4 सितंबर के बीच गोरखपुर और आसपास के रेल मार्गों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। रद्द, परिवर्तित और पुनर्निर्धारित ट्रेनों के कारण यात्रा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

रेलवे के इस अस्थायी बदलाव का उद्देश्य दोहरीकरण परियोजना को सुरक्षित तरीके से परिचालन व्यवस्था में शामिल करना है। यात्रियों को असुविधा जरूर होगी, लेकिन काम पूरा होने के बाद गोरखपुर कैंट-उनौला रेलखंड पर रेल यातायात की क्षमता और संचालन व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।

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