बाढ़ से पहले काम पूरा करने की चुनौती

Update: 2026-07-26 09:53 GMT

बिहार: भोजपुर जिले के दियरांचल क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए प्रस्तावित बक्सर-कोइलवर गंगा सुरक्षा तटबंध के अधूरे हिस्सों को भरने की योजना फिलहाल अटक गई है। राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने करीब 56 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को कुछ तकनीकी प्रावधानों में संशोधन की जरूरत बताते हुए वापस कर दिया है। अब जल संसाधन विभाग के अभियंता आयोग की टिप्पणियों के अनुसार संशोधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने में जुटे हैं। संशोधित रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे दोबारा स्वीकृति के लिए आयोग के पास भेजा जाएगा।

बक्सर-कोइलवर गंगा तटबंध के दो बड़े गैप लंबे समय से बाढ़ सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। इनमें पहला गैप शाहपुर प्रखंड के मरचइया डेरा गांव के पास है, जबकि दूसरा गैप लक्षुटोला पंचायत के राजपुर क्षेत्र के समीप स्थित है। इन दोनों स्थानों पर वर्षों पहले स्लूइस गेट निर्माण के उद्देश्य से तटबंध को अधूरा छोड़ा गया था। समय के साथ गंगा की मुख्य धारा इन स्थानों से करीब ढाई से तीन किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर चली गई, लेकिन तटबंध के गैप अब भी बने हुए हैं।

विभाग ने इन गैप को भरने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया था। तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजा गया और फिर भारत सरकार के राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया। आयोग ने प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद कुछ अतिरिक्त तकनीकी प्रावधान जोड़ने की सलाह दी और इसे वापस कर दिया।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब डीपीआर में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। गैप वाले स्थानों की मिट्टी की क्षमता और मजबूती की जांच के लिए नमूने दिल्ली स्थित केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले डीपीआर तैयार किया गया था, लेकिन आयोग के सुझावों के बाद इसमें कुछ और तकनीकी जानकारी जोड़ी जाएगी।

इस परियोजना पर कुल करीब 56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें मरचइया डेरा के पास स्थित गैप को भरने में लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां करीब 280 मीटर लंबे हिस्से में काम किया जाएगा। इस स्थान पर तीन स्लूइस गेट बनाए जाएंगे, जिससे बाढ़ के समय पानी के प्रवेश को नियंत्रित किया जा सकेगा।

वहीं, राजपुर के पास मौजूद गैप को भरने में करीब 42 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां लगभग 180 मीटर लंबे हिस्से में निर्माण कार्य होगा और नौ स्लूइस गेट लगाए जाएंगे। इन गेटों के ऊपर आवागमन के लिए पासवे भी बनाया जाएगा, जिससे तटबंध सड़क के रूप में भी उपयोग किया जा सकेगा। बाढ़ के समय गेट बंद कर पानी को रोका जाएगा, जबकि जरूरत पड़ने पर जल निकासी के लिए इन्हें खोला जा सकेगा।

बाढ़ नियंत्रण विभाग का कहना है कि तटबंध का अधूरा कार्य पूरा होने के बाद क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे बहोरनपुर, सुहियां, लालू डेरा, गौरा, करजा, डुमरिया, हरिहरपुर, बरिसवन, सेमरिया, झौवां-बेलवनिया, प्रसौंडा, सरना, भरौली और सहजौली समेत करीब 75 गांवों की लगभग डेढ़ लाख आबादी को बाढ़ से सुरक्षा मिल सकेगी।

इसके अलावा करीब 15 हजार एकड़ कृषि भूमि भी बाढ़ के नुकसान से सुरक्षित हो सकेगी। दियरांचल क्षेत्र के किसानों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हर साल गंगा के जलस्तर बढ़ने पर खेती और आवागमन दोनों प्रभावित होते हैं।

कार्यपालक अभियंता कन्हैया सिंह ने बताया कि आयोग की ओर से कुछ अतिरिक्त तकनीकी प्रावधान जोड़ने की टिप्पणी के साथ प्रस्ताव लौटाया गया है। विभाग संशोधित प्रतिवेदन तैयार कर रहा है और जल्द ही इसे दोबारा स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संशोधित डीपीआर को जल्द मंजूरी मिलेगी और वर्षों से अधूरे पड़े तटबंध का काम पूरा हो सकेगा। इससे क्षेत्र में बाढ़ का खतरा कम होगा और ग्रामीणों को हर मौसम में बेहतर संपर्क सुविधा भी मिल पाएगी।

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