बिहार: राज्य में गन्ने की खेती का रकबा लगातार घटने से चीनी उद्योग पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। पूर्वी चंपारण स्थित सुगौली चीनी मिल में भी पिछले कुछ वर्षों से चीनी उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है। किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होना इसकी बड़ी वजहों में से एक माना जा रहा है।
किसानों का कहना है कि गन्ने की खेती में मेहनत और लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके मुकाबले आमदनी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रही है। समय पर भुगतान, बढ़ती लागत, मजदूरी और अन्य फसलों से बेहतर मुनाफे की
संभावना
के कारण कई किसान अब गन्ने की जगह दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
सुगौली चीनी मिल क्षेत्र में पहले बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते थे, जिससे मिल को पर्याप्त मात्रा में गन्ने की आपूर्ति मिलती थी। लेकिन अब खेती का रकबा कम होने से मिल को भी पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ रहा है।चीनी मिल प्रबंधन के अनुसार, गन्ने की उपलब्धता में कमी के कारण पेराई सत्र प्रभावित हो रहा है। जब मिल को पर्याप्त मात्रा में गन्ना नहीं मिलता तो उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। इससे चीनी उत्पादन में साल दर साल गिरावट दर्ज की जा रही है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता गन्ने का भुगतान समय पर नहीं होना है। कई किसानों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद भुगतान मिलने से खेती की लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि वे कम समय में तैयार होने वाली और बेहतर कीमत देने वाली फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, उचित मूल्य और समय पर भुगतान की व्यवस्था जरूरी है। यदि किसानों का भरोसा वापस नहीं लौटा तो चीनी उद्योग को भविष्य में और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सुगौली चीनी मिल और क्षेत्र के किसानों के लिए गन्ने की खेती का कम होना चिंता का विषय बन गया है। अब जरूरत इस बात की है कि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि गन्ना उत्पादन बढ़े और चीनी उद्योग को मजबूती मिल सके।
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