Patna पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है। गठबंधन में शामिल बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं और इन पर मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।एनडीए गठबंधन में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) 6 सीटों पर और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी 6 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेगी।
बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने बताया कि एनडीए में शामिल सभी दलों ने आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण माहौल में सीटों का बंटवारा किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से एनडीए के भीतर लगातार बैठकें चल रही थीं, जिनमें यह तय किया गया कि चिराग पासवान कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी के बड़े नेता धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल इस दौरान चिराग पासवान को मनाने में जुटे हुए थे।
एनडीए में सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के बाद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में है। वहीं, महागठबंधन में अभी तक सीटों का बंटवारा फाइनल नहीं हुआ है। हालांकि महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि आपसी सहमति बन गई है और जल्द ही सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया जाएगा। महागठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों की बैठकें चल रही हैं और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके पुत्र और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि यहां उनकी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है। इस बैठक में महागठबंधन में सीटों के अंतिम बंटवारे और रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
एनडीए का यह कदम चुनावी मैदान में स्पष्ट संदेश देने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी और जेडीयू का बराबर बंटवारा दोनों दलों के बीच संतुलन बनाए रखने और साझा वोट बैंक को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, लोजपा, हाम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे छोटे दलों के शामिल होने से एनडीए को क्षेत्रीय मजबूती भी मिलेगी। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। सीट बंटवारे के ऐलान के बाद अब चुनावी प्रचार और उम्मीदवारों के नाम पर दलों के भीतर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए की सीट साझा नीति को देखकर विपक्षी दल भी रणनीति बदल सकते हैं और अपने उम्मीदवारों के चयन में तेजी ला सकते हैं।