Greenfield Expressway: रूट परिवर्तन को लेकर बढ़ा विवाद, जन सुराज का विरोध

Update: 2026-06-17 13:39 GMT

Bihar:बिहार के बहुचर्चित पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज पार्टी ने आरोप लगाया है कि समस्तीपुर जिले के सरायरंजन क्षेत्र में किसी प्रभावशाली व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए एक्सप्रेस-वे का रूट बदला गया है। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।

सरायरंजन क्षेत्र में रूट बदलाव पर सवाल

जन सुराज की वरिष्ठ नेता पद्मा ओझा ने कहा कि सरायरंजन क्षेत्र के 24 से अधिक मकान मालिकों और दुकानदारों ने केंद्रीय परिवहन मंत्री को शिकायत पत्र भेजा है। आरोप है कि पहले प्रस्तावित रूट के कारण एक विशेष व्यक्ति की करीब 10.5 बीघा जमीन प्रभावित हो रही थी, जिसके बाद परियोजना का रूट बदल दिया गया। इस बदलाव से सात गांवों के लगभग 150 मकान और दुकानों के साथ एक कॉलेज का हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

पार्टी नेताओं ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता। जन सुराज ने मांग की है कि सरकार सभी डीपीआर, प्रारंभिक और अंतिम अलाइनमेंट दस्तावेज सार्वजनिक करे और स्वतंत्र जांच कराए। साथ ही जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

भागलपुर पुल का मुद्दा भी उठाया

प्रवक्ता विवेक कुमार ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भागलपुर पुल में किए गए पैचवर्क का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरे राज्य में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं।

10 सवालों के जरिए सरकार से जवाब तलब

जन सुराज ने सरकार से 10 प्रमुख सवाल पूछे हैं, जिनमें रूट परिवर्तन के दस्तावेज, प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर कार्रवाई, मुआवजा और पुनर्वास योजना, वैकल्पिक रूट का अध्ययन और तकनीकी समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। पार्टी ने यह भी पूछा है कि क्या यह बदलाव तकनीकी आधार पर हुआ या राजनीतिक दबाव में।

राजनीतिक सरगर्मी तेज

इस विवाद के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जन सुराज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय या न्यायिक जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब तक सभी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होते, तब तक जनता के मन में संदेह बना रहेगा। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और विपक्ष के इन सवालों का क्या जवाब देती है।

Tags:    

Similar News