पटना। बेलदारीचक क्षेत्र के बलुआचक में बाढ़ ने रविवार को भारी तबाही मचाई। पानी के तेज दबाव के कारण डुमरी से बेलदारीचक को जोड़ने वाली पुरानी सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक ध्वस्त हो गया। सड़क किनारे खड़ा करीब 100 वर्ष पुराना विशाल पीपल का पेड़ भी जड़ से उखड़कर सड़क पर गिर गया। सड़क टूटने के बाद मौके पर गहरा गड्ढा बन गया है और इस मार्ग पर निर्भर करीब 15 गांवों का सीधा सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है।

सड़क ध्वस्त होने से स्थानीय लोगों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें आवागमन के लिए दूसरे और लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ टूटे हिस्से से तेजी से निकल रहा बाढ़ का पानी आसपास के खेतों में फैल रहा है। इससे हजारों एकड़ में लगी फसलों पर संकट मंडराने लगा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कुछ समय से इलाके में बाढ़ के पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा था। सड़क के नीचे पानी की निकासी के लिए पुलिया और पाइप लगाए गए थे, लेकिन पानी का प्रवाह इतना अधिक हो गया कि ये व्यवस्थाएं दबाव नहीं झेल सकीं।

पानी के लगातार दबाव के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी कटने लगी। इसके बाद सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया और तेज बहाव में बह गया। सड़क टूटने से वहां एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया है।

घटना के दौरान सड़क किनारे वर्षों से खड़ा विशाल पीपल का पेड़ भी पानी के कटाव की चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार पेड़ करीब 100 वर्ष पुराना था। सड़क के नीचे की मिट्टी बहने और जमीन कमजोर होने के कारण उसकी जड़ें पकड़ खो बैठीं और पूरा पेड़ उखड़कर सड़क पर गिर गया।

पुराने पीपल के पेड़ का गिरना ग्रामीणों के लिए भावनात्मक क्षति भी है। दशकों से यह पेड़ इलाके की पहचान का हिस्सा था। कई पीढ़ियों ने इसे देखा था, लेकिन बाढ़ के तेज बहाव और कटाव के सामने विशाल पेड़ भी नहीं टिक सका।

सबसे गंभीर समस्या सड़क संपर्क टूटने की है। डुमरी से बेलदारीचक जाने वाला यह मार्ग आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता था। ग्रामीण इसी सड़क से रोजमर्रा के काम, बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचते थे।

सड़क टूटने के बाद लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उनकी यात्रा लंबी होने के साथ समय और खर्च भी बढ़ गया है। विशेष रूप से बीमार लोगों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए स्थिति परेशानी वाली बन सकती है।

यदि किसी गांव में मेडिकल इमरजेंसी होती है तो एंबुलेंस या अन्य वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से पहुंचना पड़ेगा। ऐसे में सड़क की जल्द मरम्मत या अस्थायी आवागमन व्यवस्था तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है।

बाढ़ का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। सड़क टूटने के बाद पानी को खेतों की तरफ जाने का नया रास्ता मिल गया है। तेज बहाव के साथ बाढ़ का पानी आसपास के कृषि क्षेत्र में फैल रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों एकड़ में लगी फसलें इसकी चपेट में आ सकती हैं। खेतों में पानी बढ़ने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। लंबे समय तक फसल पानी में डूबी रहने पर बड़े नुकसान की आशंका हो सकती है।

किसानों के लिए मौजूदा समय महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल तैयार करने में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर पहले ही खर्च किया जा चुका है। बाढ़ के कारण फसल नष्ट होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पानी का बहाव तेज होने के कारण सड़क के टूटे हिस्से के आसपास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है। गहरा गड्ढा बनने और आसपास की मिट्टी कमजोर होने के कारण और अधिक कटाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों को विशेष रूप से रात के समय इस रास्ते से दूर रहने की जरूरत है। यदि किसी व्यक्ति को सड़क टूटने की जानकारी नहीं हो तो दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में प्रभावित स्थान पर बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों की चिंता यह भी है कि यदि बाढ़ का पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो सड़क का बचा हुआ हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा आसपास की दूसरी ग्रामीण सड़कों और पुलियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

बाढ़ के दौरान सड़क और पुलिया जैसी संरचनाओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती होती है। पानी के तेज बहाव से सड़क के नीचे की मिट्टी कटने लगती है। बाहर से सड़क सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन अंदर से उसका आधार कमजोर हो जाता है और अचानक बड़ा हिस्सा धंस सकता है।

बलुआचक में भी इसी तरह की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिया और पाइप से जितना पानी निकल सकता था, उससे कहीं ज्यादा दबाव बनने के बाद पानी ने सड़क के आधार को नुकसान पहुंचाया और आखिरकार बड़ा हिस्सा बह गया।

अब प्रभावित सड़क का तकनीकी निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा। पानी का स्तर और बहाव कम होने के बाद ही क्षति का वास्तविक आकलन किया जा सकेगा। इसके बाद यह तय होगा कि सड़क की मरम्मत संभव है या प्रभावित हिस्से को नए सिरे से बनाना पड़ेगा।

भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए पानी निकासी की क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी सामने आ सकती है। यदि मौजूदा पुलिया और पाइप अत्यधिक बाढ़ के पानी को निकालने में पर्याप्त नहीं हैं तो बड़े जल निकासी ढांचे की आवश्यकता हो सकती है।

ग्रामीणों की तत्काल जरूरत फिलहाल सुरक्षित आवागमन की है। करीब 15 गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित होने के कारण अस्थायी रास्ता तैयार करने या वैकल्पिक मार्ग को बेहतर बनाने की मांग उठ सकती है।

इसके साथ खेतों में फैल रहे पानी को नियंत्रित करना भी बड़ी चुनौती है। यदि बहाव को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो कृषि क्षेत्र में नुकसान का दायरा बढ़ सकता है।

प्रशासन के लिए सड़क और कृषि दोनों स्तरों पर नुकसान का आकलन जरूरी होगा। प्रभावित किसानों की फसलों की स्थिति का सर्वे करने के साथ ग्रामीण संपर्क बहाल करने के उपाय करने होंगे।

रविवार की घटना ने बाढ़ की ताकत का गंभीर असर दिखाया है। जिस पुरानी सड़क से वर्षों से हजारों लोग आवागमन करते थे, उसका बड़ा हिस्सा कुछ ही समय में पानी के बहाव में ध्वस्त हो गया। साथ खड़ा करीब एक सदी पुराना पीपल का पेड़ भी उखड़ गया।

फिलहाल करीब 15 गांवों के लोग वैकल्पिक रास्तों से आने-जाने को मजबूर हैं और किसानों की नजर तेजी से खेतों में फैलते पानी पर है। बाढ़ का दबाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में फसलों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को और नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।

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