अरवल। बिहार के अरवल जिले में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सदर प्रखंड के करीब 75 सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भेजी गई सोयाबीन की सब्जी में कथित तौर पर कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया।
स्कूलों में भोजन बच्चों को परोसने से पहले की गई जांच के दौरान यह मामला सामने आया। कीड़े दिखाई देने के बाद कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने तत्काल भोजन वितरण रोक दिया। इसके कारण उस दिन कई बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिल सका और उन्हें बिना भोजन के ही वापस लौटना पड़ा।
भोजन जांच के दौरान सामने आई गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार, स्कूलों में मिड-डे मील पहुंचने के बाद नियमानुसार बच्चों को खाना परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की जा रही थी।
इसी जांच के दौरान सोयाबीन की सब्जी में कीड़े दिखाई दिए। स्कूल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत बच्चों को भोजन परोसने से रोक दिया।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खराब गुणवत्ता वाले भोजन को बांटना उचित नहीं था। इसलिए उन्होंने सावधानी बरतते हुए भोजन वितरण नहीं किया।
कई स्कूलों ने की शिकायत
मामला सामने आने के बाद उमैराबाद, अहियापुर और सकरी इब्राहिमपुर समेत कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने जिला मिड-डे मील प्राधिकरण को इसकी शिकायत दी है।
प्रधानाध्यापकों ने अधिकारियों को पूरी जानकारी देते हुए बताया कि भोजन की जांच के दौरान खराबी सामने आई, जिसके बाद बच्चों के बीच खाना बांटना रोक दिया गया।
अब प्रशासन से मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। लेकिन भोजन की गुणवत्ता में इस तरह की लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
अभिभावकों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि भोजन तैयार करने और सप्लाई करने की प्रक्रिया की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
पहले भी सामने आते रहे हैं मामले
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं। कभी भोजन में गड़बड़ी तो कभी साफ-सफाई की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और मिड-डे मील प्राधिकरण की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
अधिकारियों की ओर से यह पता लगाया जाएगा कि भोजन में कीड़े कैसे पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
इसके अलावा भोजन तैयार करने, पैकिंग और स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी।
स्कूलों की जिम्मेदारी भी अहम
मिड-डे मील योजना के तहत स्कूलों को भी भोजन की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी दी जाती है। प्रधानाध्यापकों द्वारा भोजन परोसने से पहले जांच करना इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
अरवल मामले में स्कूलों ने समय रहते जांच कर बच्चों को खराब भोजन खाने से रोक दिया। इससे संभावित स्वास्थ्य समस्या को टाला जा सका।
बच्चों को नहीं मिला भोजन
सोयाबीन की सब्जी खराब पाए जाने के बाद कई स्कूलों में उस दिन मिड-डे मील नहीं परोसा जा सका। इसके कारण कई बच्चों को बिना भोजन के ही रहना पड़ा।
हालांकि, स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया। अब प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन से जवाब की उम्मीद
अरवल जिले की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत को सामने ला दिया है।
बच्चों को मिलने वाले भोजन में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर विषय है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।