प्रशांत किशोर का राजीव कुमार पर निशाना, रिटायरमेंट के बाद मिली बड़ी पोस्ट
पटना। जन सुराज पार्टी के विधायक प्रशांत किशोर ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के कार्यकाल और सेवानिवृत्ति के बाद मिली नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल केवल मौजूदा प्रमुख के कार्यकाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे पहले भी ऐसी परिस्थितियां देखने को मिली हैं। प्रशांत किशोर ने राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद निजी क्षेत्र में बड़े पद पर नियुक्ति का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल किए।
प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और INDIA गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। इस बीच प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर व्यापक सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता जरूरी है।
ज्ञानेश कुमार के साथ पूर्व सीईसी राजीव कुमार का भी जिक्र
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल केवल ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में नहीं उठे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। प्रशांत किशोर ने राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए।
उनके बयान का मुख्य आधार यह सवाल था कि संवैधानिक पदों पर काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निजी क्षेत्र में बड़े पद मिलने की स्थिति में संस्थागत निष्पक्षता को लेकर जनता के मन में उठने वाली शंकाओं को कैसे दूर किया जाए।
हालांकि, किसी पूर्व अधिकारी की सेवानिवृत्ति के बाद निजी क्षेत्र में नियुक्ति होना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। प्रशांत किशोर ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन उनके बयान के आधार पर किसी अनुचित लेनदेन या पक्षपात को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राजीव कुमार 2025 में हुए थे सेवानिवृत्त
राजीव कुमार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में वर्ष 2022 से 2025 तक कार्य किया और फरवरी 2025 में सेवानिवृत्त हुए। बाद में उन्हें एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद पर नियुक्त किया गया। इसी नियुक्ति का उल्लेख करते हुए प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद निजी क्षेत्र में मिलने वाले पदों पर सवाल उठाए हैं।
प्रशांत किशोर का कहना है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर चर्चा करते समय केवल मौजूदा घटनाओं को नहीं, बल्कि पहले के कार्यकालों और संस्थागत व्यवस्था को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव से संबंधित निर्णयों और प्रक्रियाओं पर उठने वाले सवालों को व्यापक संदर्भ में रखने की जरूरत बताई।
केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से नहीं होगा समाधान
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में यह भी कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दे का समाधान केवल मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो सके।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। इनमें मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव कार्यक्रम घोषित करने और आदर्श आचार संहिता लागू करने जैसे विषय शामिल हैं। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्यवस्था में सुधार महत्वपूर्ण है।
INDIA गठबंधन भी कर रहा है विरोध प्रदर्शन
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन के नेता भी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के लिए पुनरीक्षण प्रक्रिया को जरूरी बताते हैं।
इस मुद्दे पर जारी राजनीतिक बहस के बीच प्रशांत किशोर का बयान महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ उनके पूर्ववर्ती के कार्यकाल और सेवानिवृत्ति के बाद मिली नियुक्ति का भी उल्लेख किया है।
बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच बयान चर्चा में
बिहार में विधान परिषद चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशांत किशोर का यह बयान सामने आया है। राज्य में राजनीतिक दल चुनावी गतिविधियों में जुटे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा चर्चा में है।
फिलहाल, प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद निजी बैंक में नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं। वहीं, इस नियुक्ति से किसी तरह की अनियमितता साबित होने का निष्कर्ष उनके बयान मात्र से नहीं निकाला जा सकता।