Bihar बिहार: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। मधेपुरा में आयोजित जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि “RJD एक एक्सपायर्ड दवा की तरह है, जिसे बिहार ने 15 साल तक इस्तेमाल किया, लेकिन उसने किसी भी बीमारी का इलाज नहीं किया। उल्टा उसने राज्य को और बीमार बना दिया।”
प्रशांत किशोर ने भीड़ से संवाद करते हुए कहा कि बिहार ने पिछले तीन दशकों में दो बड़े राजनीतिक प्रयोग किए — एक आरजेडी का और दूसरा एनडीए का, लेकिन दोनों ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। “RJD के शासन में बिहार जंगलराज का शिकार हुआ, जहां अपराध, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी चरम पर थी। और अब जब वही पुराने चेहरे नई बातें कर रहे हैं, तो जनता को समझना चाहिए कि यह एक्सपायर्ड दवा अब असर नहीं करेगी,” उन्होंने कहा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “लालू यादव और उनके परिवार ने गरीबों के नाम पर राजनीति की, लेकिन आज उनके बच्चे महलों में रहते हैं और गरीब आज भी सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं। बिहार को ऐसे नेताओं की जरूरत नहीं जो अपने परिवार की तरक्की सोचें, बल्कि ऐसे लोगों की जरूरत है जो राज्य की असली समस्याओं का समाधान करें।”
प्रशांत किशोर ने जन सुराज यात्रा के दौरान जनता से अपील की कि वे अब जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास आधारित राजनीति को चुनें। उन्होंने कहा कि “बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग के लिए एक नई सोच की जरूरत है। जब तक लोग पुराने राजनीतिक ब्रांडों से बाहर नहीं आएंगे, तब तक बिहार में कोई बदलाव नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए और आरजेडी दोनों ही पार्टियां सत्ता के लिए जनता को गुमराह कर रही हैं। “एक पार्टी धर्म के नाम पर राजनीति करती है और दूसरी जाति के नाम पर। लेकिन दोनों का मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना है, जनता की सेवा नहीं,” किशोर ने कहा।
जन सुराज अभियान के तहत प्रशांत किशोर ने मधेपुरा के कई गांवों का दौरा किया और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग बदलाव चाहते हैं, लेकिन अभी भी डर और निराशा की राजनीति में फंसे हुए हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आगे आकर एक नए बिहार के निर्माण में भागीदारी करें।
पीके (प्रशांत किशोर) ने कहा कि आने वाले चुनावों में जनता को यह तय करना होगा कि वे फिर से ‘जंगलराज’ और ‘भ्रष्टाचार’ की वापसी चाहते हैं या एक नए बिहार की शुरुआत। “जन सुराज कोई चुनावी स्टंट नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है,” उन्होंने कहा।