बिहार के स्कूल-कॉलेजों में तैनात होंगी पुलिस दीदी, छात्राओं की सुरक्षा पर जोर
पटना। बिहार में छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि रक्षाबंधन के दिन से राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी की तैनाती की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बहन-बेटियों की सुरक्षा और उनका मान-सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से महिला सुरक्षा से जुड़े पुलिस तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस दीदी को अधिक प्रभावी तरीके से काम करने के लिए संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस दीदी को पांच हजार स्कूटी और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराई गई हैं। इन वाहनों की मदद से पुलिसकर्मी स्कूल-कॉलेजों और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा सकेंगी। किसी शिकायत या आपात स्थिति की सूचना मिलने पर तेजी से मौके पर पहुंचने में भी सुविधा होगी।
स्कूलों और कॉलेजों में पुलिस दीदी की मौजूदगी का उद्देश्य छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। शिक्षण संस्थानों के आसपास छात्राओं से छेड़छाड़, पीछा करने या अन्य तरह की परेशानियों की शिकायतों पर स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने में यह व्यवस्था मददगार हो सकती है। इसके साथ ही छात्राओं को अपनी समस्याएं पुलिस तक पहुंचाने के लिए एक आसान माध्यम भी मिलेगा।
रक्षाबंधन से इस व्यवस्था की शुरुआत करने को महिला सुरक्षा और सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। राज्य सरकार चाहती है कि छात्राएं बिना किसी डर के स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। इसके लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि अपराध की रोकथाम पर भी जोर दिया जा रहा है।
पुलिस दीदी शिक्षण संस्थानों में छात्राओं से संवाद स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कई बार छात्राएं अपनी परेशानी या उनके साथ हुई किसी घटना की जानकारी तत्काल परिवार या पुलिस को नहीं दे पाती हैं। स्कूल और कॉलेज में महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी से ऐसी छात्राओं के लिए शिकायत करना आसान हो सकता है। इससे पुलिस को भी समस्याओं की जानकारी शुरुआती स्तर पर मिल सकेगी।
पांच हजार स्कूटी और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने का उद्देश्य पुलिस की गतिशीलता बढ़ाना है। वाहनों की मदद से पुलिस दीदी एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से पहुंच सकेंगी। स्कूल और कॉलेज शुरू होने तथा छुट्टी होने के समय आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त भी बढ़ाई जा सकेगी। भीड़भाड़ वाले स्थानों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और छात्राओं के आवागमन वाले प्रमुख मार्गों पर भी निगरानी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का जोर महिला सुरक्षा के साथ राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को सुरक्षित और समृद्ध राज्य बनाने के संकल्प के साथ सरकार लगातार काम कर रही है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से आम लोगों में विश्वास बढ़ने के साथ राज्य के विकास के लिए भी बेहतर माहौल तैयार होता है।
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के अलावा मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित विषयों पर भी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में विद्यार्थियों का विश्वास सर्वोपरि है। परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें विद्यार्थियों को निष्पक्षता और पारदर्शिता पर पूरा भरोसा हो। प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं में किसी तरह की गड़बड़ी से लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है, इसलिए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री की ओर से कई अन्य घोषणाएं भी की गई हैं। सरकार का प्रयास शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है। विद्यार्थियों से जुड़े मामलों में सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है, जिसमें उन्हें पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण मिल सके।
पुलिस दीदी की तैनाती को छात्राओं के बीच पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर किसी शिक्षण संस्थान में पुलिस की मौजूदगी सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई में मदद करती है। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से छात्राएं अपनी बात अधिक सहजता से रख सकती हैं। साथ ही पुलिस दीदी छात्राओं को साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों और आपातकालीन सहायता के तरीकों के प्रति जागरूक करने में भी भूमिका निभा सकती हैं।
आज के समय में छात्राओं की सुरक्षा केवल स्कूल या कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर उत्पीड़न और फर्जी प्रोफाइल जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस तक शिकायत पहुंचना जरूरी होता है। पुलिस दीदी जैसी व्यवस्था के माध्यम से छात्राओं को साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया जा सकता है।
सरकार की योजना का प्रभाव इसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। राज्य में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज हैं। ऐसे में पुलिस दीदी की तैनाती, उनके कार्यक्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में छात्राओं तक सुरक्षा व्यवस्था की पहुंच सुनिश्चित करना बड़ी जिम्मेदारी होगी।
रक्षाबंधन से शुरू होने वाली पुलिस दीदी की तैनाती के जरिए सरकार ने महिला सुरक्षा को प्रमुखता देने का संदेश दिया है। पांच हजार स्कूटी और मोटरसाइकिल के जरिए उनकी गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बहन-बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के साथ विद्यार्थियों का परीक्षा व्यवस्था में विश्वास सरकार के लिए सर्वोपरि है। आने वाले समय में इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।