ध्वनि एवं पर्यावरण प्रदूषण मामले में पटना HC सख्त, थानाध्यक्षों की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

Update: 2026-06-19 12:06 GMT

Bihar बिहार: पटना में ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने को लेकर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ढीली कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए साफ संकेत दिया है कि आदेशों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

न्यायाधीश राजीव रॉय की एकलपीठ ने सुरेंद्र प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए विभिन्न थानों की ओर से प्रस्तुत अनुपालन प्रतिवेदनों की समीक्षा की। इस दौरान अदालत ने पाया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास प्रभावी नहीं हो सके हैं।

अदालत ने विशेष रूप से थानाध्यक्षों की कार्यशैली पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि जमीनी स्तर पर नियमों के पालन में गंभीरता की कमी दिखाई दे रही है। न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में लापरवाही जारी रही तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें शहर में डीजे सिस्टम, उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम और प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न के अनियंत्रित उपयोग को लेकर चिंता जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि इन गतिविधियों के कारण आम लोगों को गंभीर असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता के लिए न्यायालय मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता अजय उपस्थित रहे, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने यह माना कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण न केवल कानून व्यवस्था का विषय है, बल्कि यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इसलिए पुलिस और प्रशासन को इस पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि नियमों का सख्ती से पालन हो।

हाई कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कार्रवाई और सख्त की जा सकती है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

कुल मिलाकर, पटना हाई कोर्ट के इस रुख ने ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन को तत्काल प्रभावी कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।

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