मधुबनी में मरीज बेहाल, डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी

Update: 2026-07-22 11:35 GMT

मधुबनी। अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन पर हुए कथित हमले के विरोध में बुधवार को मधुबनी जिले में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सदर अस्पताल समेत अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से करीब पांच हजार मरीज इलाज से वंचित रह गए और उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

डॉक्टरों ने बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर ओपीडी सेवा बंद रखकर अरवल की घटना का विरोध किया। सदर अस्पताल में सुबह ओपीडी खुलने के बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कुछ मरीज पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के कारण निबंधन प्रक्रिया भी रोक दी गई। शुरुआती समय में सिर्फ चार मरीजों का पंजीकरण हो पाया, जिनमें दो गायनिक और दो फिजियोथेरेपी विभाग के मरीज शामिल थे। इसके बाद डॉक्टरों ने ओपीडी बहिष्कार शुरू कर दिया।

हड़ताल की जानकारी नहीं होने के कारण कई मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। कजियाना निवासी सुनील यादव पैर में चोट के कारण इलाज कराने पहुंचे थे। डॉक्टर ने उन्हें पहले से समय दिया था, लेकिन ओपीडी बंद होने की वजह से उनका पंजीकरण नहीं हो सका। करीब डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि अस्पताल आने-जाने में करीब 400 रुपये खर्च हुए, लेकिन इलाज नहीं हो पाया।

इसी तरह बेल्हवार निवासी डोमा पासवान दोनों पैरों में सूजन की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन ओपीडी बंद होने से उन्हें भी इलाज नहीं मिला। उनकी बहू को महिला रोग विशेषज्ञ से दिखाना था, जबकि शहर की नवनीता कुमारी हड्डी विभाग में इलाज कराने पहुंची थीं। सभी मरीजों को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ा।

सदर अस्पताल के ओपीडी भवन के बाहर चिकित्सकों ने धरना देकर अरवल की घटना पर नाराजगी जताई। प्रदर्शन में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे। डॉक्टरों ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों पर हो रहे हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अस्पतालों में भय का माहौल रहने से डॉक्टर बेहतर तरीके से अपनी सेवाएं नहीं दे पाते हैं।

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के राज्य उपाध्यक्ष सह जिला सचिव डॉ. कुणाल कौशल ने बताया कि अरवल में सिविल सर्जन और चिकित्सकों के साथ हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संघ ने सरकार और जिला प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें घटना में शामिल सभी आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर सख्त कार्रवाई, सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग शामिल है।

डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएं चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल गिरा रही हैं। यदि डॉक्टर सुरक्षित माहौल में काम नहीं करेंगे तो इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। वहीं, मरीजों ने भी सरकार से मांग की है कि डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों के इलाज की व्यवस्था भी सुचारू रखी जाए।

फिलहाल डॉक्टरों की हड़ताल के कारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

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