बिहार   स्कूली छात्रों के लिए सरकार ने एक अच्छी योजना शुरू की है. शिक्षा मंत्रालय की इस योजना का नाम प्रमोशन ऑफ रिसर्च एटीट्यूड इन यंग एंड एस्पाइयरिंग स्टूडेंट (प्रयास) है. छात्रों को वैज्ञानिक पद्धति और प्रयोगों के माध्यम से रिसर्च और खोज का अवसर दिया जाएगा. इसके तहत स्कूली छात्र स्थानीय समस्याओं पर शोध कर सकेंगे. राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने ‘प्रयास’ योजना 2023-24 के लिए एक दिशा-निर्देश तैयार किया है. इसकी शुरुआत 10 अक्टूबर से होनी है.
प्रत्येक चयनित शोध प्रस्ताव के लिए कुल 50 हजार का प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत प्रत्येक चयनित शोध प्रस्ताव के लिए कुल 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जाएगा. इस राशि में से 10 हजार रुपये छात्र को दिये जाएंगे. इनमें से छात्रों को शोधकार्य करने में सुविधा प्रदान करने के लिए स्कूलों को 20 हजार रुपये और उच्च शिक्षण संस्थान के विशेषज्ञ को भी 20 हजार रुपये दिये जाएंगे. परियोजना 10 अक्टूबर 2023 से शुरू होगी.
विज्ञान कौशल और रचनात्मकता का विकास करना है उद्देश्य ‘प्रयास’ योजना का मकसद युवा छात्रों के बीच वैज्ञानिक चिंतन उत्पन्न करना और साक्ष्य आधारित विज्ञान प्रक्रिया कौशल, नवीनता और रचनात्मकता का विकास करना है. इसमें व्यक्तिगत रूप से या समूहों में अनुसंधान या खोज करने के लिए छात्रों में क्षमता विकास पर जोर दिया गया है. इसमें किसी स्थानीय समस्या की पहचान और उसका अध्ययन करने, इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों की जांच करने एवं समाधान खोजने और किसी विचार, कल्पना या अवधारणा पर शोध करने पर जोर दिया गया है. योजना के तहत छात्रों को शोध के लिए वित्तीय मदद के साथ-साथ योग्य शिक्षक भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
योजना का लाभ लेने के लिए 14 से 18 वर्ष के छात्र ही होंगे पात्र ‘प्रयास’ योजना में भाग लेने वाले स्टूडेंट की आयु 14-18 वर्ष होगी और नौवीं से 11वीं कक्षा में अध्ययनरत होना अनिवार्य होगा. सभी स्कूलों के छात्र ‘प्रयास’ योजना में भाग लेने के पात्र हैं. इसमें एक छात्र या अधिकतम दो छात्रों के समूह के साथ स्कूल के एक शिक्षक और किसी उच्च शिक्षण संस्थान के एक विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं.
इसके तहत प्रति विद्यालय केवल एक ही आदेवन का चयन किया जाएगा. इस परियोजना की अवधि स्कूल में कार्यक्रम शुरू होने की तारीख से एक वर्ष के लिए है. प्रयास 2023-24 के लिए कार्यकाल का समय 10 अक्टूबर 2023 से शुरू होकर 9 अक्टूबर 2024 तक रहेगा. इस परियोजना में स्कूल के एक विज्ञान शिक्षक को पूरे कार्यकाल के दौरान छात्रों को उनके शोध कार्य में मार्गदर्शन के लिए नियुक्त किया जाएगा. स्कूलों के नजदीक स्थित किसी उच्च शिक्षण संस्थान के विज्ञान विशेषज्ञ भी छात्रों को तकनीकी एवं प्रायोगिक मार्गदर्शन करेंगे और प्रयोगशाला उपकरणों आदि के बारे में जानकारी देंगे.
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