नाबालिग ‘पीड़िता’ का चौंकाने वाला खुलासा, बोली- झूठा केस रचकर 4 लाख का मुआवजा लिया, अब लौटाना चाहती हूं
Munger, मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। धरहरा थाना क्षेत्र की एक युवती ने राष्ट्रपति, राज्यपाल, पटना हाईकोर्ट और पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर दावा किया है कि जब वह नाबालिग थी, तब उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर साजिश रचकर उसे ‘कथित दुष्कर्म पीड़िता’ बना दिया। युवती का कहना है कि उसके साथ कोई घटना हुई ही नहीं थी, फिर भी झूठा केस दर्ज कराकर सरकार से 4 लाख रुपये का मुआवजा लिया गया।युवती ने 1 अप्रैल 2026 को बालिग होते ही यह कदम उठाया। अपने पत्र में उसने लिखा, “मैं नाबालिग थी, इसलिए परिवार और पुलिस के दबाव में आ गई। अब मैं बालिग हूं और सच बोलना चाहती हूं। मैं नहीं चाहती कि कोई बेकसूर जेल में सड़ता रहे।”परिवार ने बनाया मोहरा, मकसद था मुआवजायुवती ने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों ने जानबूझकर यह साजिश रची। मकसद था सरकारी मुआवजे की 4 लाख रुपये की राशि हासिल करना। युवती ने इस पैसे को ‘खून का पैसा’ बताते हुए सरकार को लौटाने की इच्छा जताई है।
इस मामले में रवि कुमार नामक युवक को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना रखी है। युवती ने साफ कहा कि रवि कुमार पूरी तरह निर्दोष है। उसने कहा, “मैं उसे जानती तक नहीं हूं। पुलिस और परिवार के दबाव में मुझे झूठी गवाही देनी पड़ी।”पुलिस पर गंभीर आरोपयुवती ने धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका दावा है कि उसे लगभग 30 घंटे अवैध हिरासत में रखकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। डराकर CRPC की धारा 164 के तहत झूठा बयान दिलवाया गया। उसने 7 सितंबर 2022 के जमालपुर थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है। साथ ही गलत चार्जशीट दाखिल करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी अपील की है।एसआईटी गठन और निर्दोष की रिहाई की मांगयुवती ने पटना हाईकोर्ट से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) गठन करने की मांग की है। उसने सरकार से अपील की है कि 4 लाख रुपये का मुआवजा वापस लिया जाए और निर्दोष रवि कुमार को तुरंत रिहा किया जाए।क्या बोले अधिवक्ता?मुंगेर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया, “युवती ने जिला स्तर से लेकर राष्ट्रपति, राज्यपाल, पटना हाईकोर्ट और पुलिस मुख्यालय तक पत्र लिखा है। उसमें उसने पूरी घटना का ब्योरा दिया है। यह मामला POCSO एक्ट के दुरुपयोग का एक उदाहरण है। लड़की का कहना है कि आरोपी लड़के को वह जानती तक नहीं है। वह मुआवजे की राशि भी लौटाना चाहती है। इस मामले की गहन जांच जरूरी है।”POCSO एक्ट का दुरुपयोग?यह मामला बिहार में POCSO एक्ट और दुष्कर्म मामलों में हो रहे दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। कई बार परिवार आर्थिक लाभ के लिए या व्यक्तिगत रंजिश में झूठे मामले दर्ज कराते हैं, जिससे निर्दोष युवकों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। वहीं असली पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।वर्तमान में यह पूरा मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट अब इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है, यह देखने वाली बात होगी।युवती ने अंत में लिखा, “मैं सच्चाई सामने लाना चाहती हूं। बेकसूर को सजा नहीं मिलनी चाहिए।”