विधानसभा में पेश हुआ भारी-भरकम बजट, सरकार ने गिनाए लक्ष्य

Update: 2026-07-20 08:51 GMT

पटना। बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र की शुरुआत इस बार सिर्फ राजनीतिक गर्मागर्मी और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकार ने राज्य के विकास को लेकर बड़ा वित्तीय खाका भी पेश किया। सत्र के पहले दिन बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 87,383.43 करोड़ रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया। सरकार ने इस बजट के जरिए विकास योजनाओं को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने का दावा किया है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में यह अनुपूरक बजट पेश किया। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त राशि का सबसे बड़ा हिस्सा वार्षिक योजनाओं और विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त बजट से राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी मिलेगी और अधूरे विकास कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में कुल 57,077.96 करोड़ रुपये वार्षिक योजनाओं के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा सेंट्रल स्कीम मद में 39.48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, वेतन और पेंशन के भुगतान के लिए 32,265 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने कहा कि बजट में विकास और कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

अनुपूरक बजट में बिहार के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सड़क और पुल निर्माण, बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा क्षेत्र, रोजगार सृजन, पटना मेट्रो परियोजना, मेडिकल कॉलेज निर्माण, छात्रवृत्ति योजनाओं और बिजली सब्सिडी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया है।

सरकार का कहना है कि राज्य में आधारभूत संरचना को मजबूत करना उसकी प्रमुख प्राथमिकता है। सड़क और पुल निर्माण से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना है। वहीं, बिजली क्षेत्र में सुधार और सब्सिडी के माध्यम से आम लोगों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है।

शिक्षा और रोजगार को लेकर भी बजट में कई प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और छात्रों को सहायता उपलब्ध कराने वाली योजनाओं पर फोकस किया है। छात्रवृत्ति योजनाओं के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने की बात कही गई है।

हालांकि, मॉनसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक हंगामे से भी अछूता नहीं रहा। विधानसभा परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। जहां सरकार ने अनुपूरक बजट, विकास योजनाओं और अपनी उपलब्धियों को सदन में रखा, वहीं विपक्ष ने केंद्र सरकार और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।

विपक्षी दलों ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। विधानसभा परिसर में प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार से जवाब मांगे और जनता से जुड़े मामलों को उठाया। वहीं, सत्ता पक्ष ने अपने कामों और विकास योजनाओं को गिनाते हुए सरकार की उपलब्धियां बताईं।

पहले दिन की कार्यवाही के दौरान विधान परिषद में भी चर्चा हुई। एमएलसी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पहली बार सदन में भाषण दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में लगातार काम किया गया है।

निशांत कुमार ने कहा कि सरकार ने दलित, महादलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, मजदूर, युवा और महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार ने पिछले दो दशकों में विकास के क्षेत्र में लंबी दूरी तय की है और आज राज्य देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन सरकार ने जहां बड़े वित्तीय पैकेज के जरिए विकास का रोडमैप पेश किया, वहीं विपक्ष ने अपने मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। अब आने वाले दिनों में सदन में बजट और अन्य विधेयकों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

Tags:    

Similar News