18 शवों का एक साथ अंतिम संस्कार, नई सुविधा शुरू

Update: 2026-06-25 12:54 GMT

Bihar: पटना में अंतिम संस्कार व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी के बांसघाट स्थित श्मशान घाट को अब एशिया का सबसे बड़ा और आधुनिक श्मशान घाट बताया जा रहा है। यह परिसर करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें पारंपरिक तथा आधुनिक दोनों तरह की सुविधाओं को शामिल किया गया है।

इस नए श्मशान घाट में एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इससे शहर में अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली भीड़ और लंबी प्रतीक्षा की समस्या में काफी राहत मिलने की उम्मीद है। यहां पारंपरिक लकड़ी आधारित व्यवस्था के साथ-साथ इलेक्ट्रिक और आधुनिक तकनीक पर आधारित शवदाह यूनिट भी स्थापित की गई हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस पूरा परिसर

Bansghat Crematorium Patna को एक व्यवस्थित और सुविधाजनक परिसर के रूप में विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोगों के लिए दो एसी वेटिंग हॉल बनाए गए हैं, जहां परिजनों को बैठने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा कैंटीन, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

परिसर में गंगाजल से भरे दो विशेष तालाब बनाए गए हैं, जिनमें से एक स्नान के लिए और दूसरा अस्थि विसर्जन के लिए निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था अंतिम संस्कार के दौरान आने वाले लोगों की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई है।

एक साथ 18 अंतिम संस्कार की क्षमता

श्मशान घाट में कुल 8 पारंपरिक चबूतरे बनाए गए हैं, जहां लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसके साथ ही 4 इलेक्ट्रिक शवदाह यूनिट और 6 पर्यावरण अनुकूल भट्टियां स्थापित की गई हैं। इन सभी व्यवस्थाओं के कारण एक समय में 18 शवों का अंतिम संस्कार संभव हो जाता है।

निर्धारित शुल्क और सेवाएं

यहां अंतिम संस्कार से जुड़ी सेवाओं के लिए शुल्क भी तय किया गया है। शवदाह के लिए लगभग 3500 रुपये शुल्क निर्धारित है। डोम राजा के लिए 500 रुपये, पंडित के लिए 250 रुपये और नाई सेवा के लिए 150 रुपये का शुल्क रखा गया है। यदि कोई परिवार लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार करता है तो लकड़ी का खर्च अलग से देना होगा।

गरीब परिवारों के लिए राहत योजना

जानकारी के अनुसार आने वाले समय में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त अंतिम संस्कार सुविधा देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि यह सुविधा अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन इसे भविष्य की योजना में शामिल किया गया है।

गैस आधारित शवदाह प्रणाली की तैयारी

श्मशान परिसर में गैस आधारित आधुनिक फर्नेस भी स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें अगले कुछ दिनों में शुरू करने की तैयारी है। इनके शुरू होने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और तेज तथा कम खर्चीली हो जाएगी।

संचालन और सामाजिक पहल

इस पूरे परिसर का संचालन ईशा फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। संस्था ने यहां प्रशिक्षित वॉलंटियरों की तैनाती की है, जिनमें कई युवा शामिल हैं जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर सामाजिक सेवा का रास्ता चुना है। ईशा फाउंडेशन पहले से ही तमिलनाडु में कई शवदाह गृहों का संचालन कर रहा है।

राज्य के अन्य शहरों में भी विस्तार योजना

बिहार सरकार और ईशा फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के तहत राज्य के अन्य शहरों में भी इसी तरह के आधुनिक श्मशान घाट विकसित किए जाने की योजना है। पटना के दीघा घाट में एलपीजी आधारित शवदाह गृह बनाने की तैयारी है। इसके अलावा बेगूसराय, भागलपुर, गया, सहरसा और छपरा में भी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सद्गुरु का बिहार दौरा

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक Sadhguru 26 जून से तीन दिवसीय बिहार दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और पटना के बापू सभागार में कार्यक्रम में शामिल होंगे। 28 जून को उनका दौरा समाप्त होगा।

इस तरह पटना का यह आधुनिक श्मशान घाट न केवल सुविधाओं के लिहाज से उन्नत है, बल्कि इसे एक सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से विकसित अंतिम संस्कार केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

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