पटना: राजधानी पटना में साइबर ठगी की रकम कमीशन पर निकालने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए युवक की पहचान बबलू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपित भौतिकी से स्नातक है और ऑनलाइन ट्रेडिंग में नुकसान के बाद कर्ज में फंस गया था। आरोप है कि इसके बाद वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आया और उनके लिए बैंक खातों से पैसे निकालने लगा। पुलिस अब उससे जुड़े खातों, लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। 
पुलिस ने रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर उसे पकड़ा। कार्रवाई के दौरान उसके पास से विभिन्न बैंकों के 15 एटीएम कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि इन कार्डों से जुड़े खाते किन लोगों के हैं और उनका इस्तेमाल किस तरह के लेनदेन में किया गया। बरामद उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल से नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। 
ट्रेडिंग में नुकसान के बाद बढ़ा कर्ज
पुलिस पूछताछ के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बबलू को ऑनलाइन ट्रेडिंग में नुकसान हुआ था और उस पर करीब पांच से छह लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसके बाद वह राजस्थान गया, जहां कथित तौर पर साइबर अपराधियों से जुड़ा। पुलिस का आरोप है कि आगे चलकर उसने उत्तर प्रदेश के बस्ती में भी बैंक खाते खुलवाए। संदिग्ध रकम आने पर खाते ब्लॉक होने के बाद वह पटना में रहने लगा। जांच में सामने आई यह कहानी फिलहाल पुलिस के बयान पर आधारित है। ट्रेडिंग में नुकसान और कर्ज को अपराध से जुड़ने की वजह बताया गया है, लेकिन आरोपित की भूमिका का निर्धारण मामले के साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से होगा। 
निकासी पर मिलता था कमीशन
जांच के मुताबिक, दूसरे लोगों के बैंक खातों में ठगी की रकम आने के बाद बबलू एटीएम से उसकी निकासी करता था। आरोप है कि इस काम के बदले उसे पांच से आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था। बाकी रकम गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुंचाई जाती थी। खाते उपलब्ध कराने के मामले में रोहतास की एक महिला की भूमिका भी पुलिस की जांच में है। साइबर डीएसपी संगीता के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में लगभग 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। कुल रकम की अंतिम पुष्टि विस्तृत वित्तीय जांच के बाद ही हो सकेगी। 
साइबर पोर्टल की शिकायतों से जुड़े सुराग
पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपित से संबंधित लगभग 40 शिकायतें साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिली हैं। इन शिकायतों और बरामद बैंकिंग सामग्री के बीच संबंध की जांच की जा रही है। अलग-अलग शिकायतों में दर्ज रकम, तारीख और बैंक खातों का मिलान मामले की तस्वीर स्पष्ट करने में मदद कर सकता है। शिकायतों की संख्या को दोष सिद्ध होने के समान नहीं माना जा सकता। हर शिकायत में संबंधित व्यक्ति की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की अलग जांच जरूरी होती है। इसी तरह किसी खाते में संदिग्ध रकम आने और उस रकम को निकालने वाले व्यक्ति की पहचान के बीच संबंध स्थापित करना भी महत्वपूर्ण है। 
खातों और मोबाइल की जांच क्यों अहम
इस मामले में केवल गिरफ्तारी ही जांच का अंतिम पड़ाव नहीं है। जिस व्यक्ति से एटीएम कार्ड मिला, जिस व्यक्ति के नाम बैंक खाता है और जिसने ठगी की शुरुआत की—इनकी भूमिका अलग-अलग हो सकती है। जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि किसे लेनदेन की जानकारी थी और कौन किसके निर्देश पर काम कर रहा था। मोबाइल फोन में उपलब्ध संपर्क और बैंकिंग रिकॉर्ड जैसे साक्ष्यों को साथ पढ़ने से पैसे के प्रवाह को समझा जा सकता है। उदाहरण के लिए, खाते में रकम आने और उसके तुरंत बाद निकासी होने का रिकॉर्ड लेनदेन का समय बताता है। लेकिन उस निकासी का उद्देश्य और संबंधित व्यक्ति की जानकारी स्थापित करने के लिए अन्य साक्ष्य भी जरूरी होते हैं। 
अन्य सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश
बरामद मोबाइल और एटीएम कार्ड की जांच के जरिए पुलिस अन्य सहयोगियों तथा बैंक खातों के नेटवर्क को खंगाल रही है। पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी की पुष्टि दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड से करना आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगा। अभी यह देखना बाकी है कि संबंधित खातों में आई रकम किन शिकायतों से जुड़ती है और किन लोगों तक पहुंची। news4nation.कॉम मामला कमीशन के बदले दूसरों के बैंक खातों से पैसे निकालने में शामिल जोखिम को भी सामने लाता है। केवल पैसा निकालने का काम बताकर किसी व्यक्ति की वास्तविक भूमिका तय नहीं की जा सकती। रकम का स्रोत, खाते के इस्तेमाल की अनुमति और लेनदेन की जानकारी जैसे सवाल अहम रहते हैं। फिलहाल बबलू के खिलाफ आरोपों की जांच जारी है और पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।
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