नालंदा। बिहार के नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस घटना को शुरुआत में शराब तस्करों की फायरिंग में सिपाही की हत्या बताया जा रहा था, उसकी कहानी पुलिस जांच में गलत निकली। जांच में सामने आया है कि अजीत कुमार को शराब तस्करों की नहीं, बल्कि अपनी ही टीम के होमगार्ड जवान की राइफल से चली गोली लगी थी। इस खुलासे के बाद उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने मामले में महिला दारोगा पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
नालंदा के पुलिस अधीक्षक हृदयकांत ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना के बाद उत्पाद विभाग की टीम ने वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने का प्रयास किया था। जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे शराब तस्करों की ओर से गोली चलाए जाने की शुरुआती कहानी पर सवाल खड़े हो गए। राजगीर डीएसपी के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल ने पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया।
शराब तस्करों से मुठभेड़ की कहानी निकली गलत
जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर की रात करीब साढ़े दस बजे उत्पाद विभाग की टीम को शराब की खेप ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने नालंदा जिले में शराब से लदी एक संदिग्ध पिकअप वैन का पीछा शुरू किया।
घटना पावापुरी क्षेत्र के आसपास की बताई गई है। शुरुआत में दावा किया गया था कि पिकअप वैन में सवार शराब तस्करों ने पीछा कर रही उत्पाद विभाग की टीम पर फायरिंग कर दी।इसी गोलीबारी में सिपाही अजीत कुमार को गोली लगने और उनकी मौत होने की जानकारी दी गई थी।लेकिन जब पुलिस ने घटनास्थल, वाहनों और संबंधित जवानों की गतिविधियों की जांच की, तो शुरुआती बयान और वास्तविक परिस्थितियों में अंतर सामने आने लगा।
तीन गाड़ियों में चल रही थी उत्पाद विभाग की टीम
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, शराब तस्करों की पिकअप वैन सबसे आगे चल रही थी। उसके पीछे एक काली स्कॉर्पियो थी, जिसमें सिपाही अजीत कुमार सवार थे।स्कॉर्पियो के पीछे उत्पाद विभाग की महिला दारोगा पुष्पा कुमारी की गाड़ी चल रही थी।पीछा करने के दौरान टीम को संदिग्ध वाहन के भागने का अंदेशा हुआ। इसी बीच महिला दारोगा की ओर से फायरिंग करने का निर्देश दिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद होमगार्ड जवान ने दूसरे जवान की राइफल से गोली चलाई। गोली आगे चल रही स्कॉर्पियो में सवार अजीत कुमार के सिर के पिछले हिस्से में लग गई।इस घटना में अजीत गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।
साथी जवान की राइफल से चली थी जानलेवा गोली
जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि अजीत कुमार को लगी गोली उत्पाद विभाग की अपनी टीम के हथियार से चली थी।पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई राइफल को जब्त कर लिया है। इसके साथ कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर विरोधाभासी बयान मिले थे।जब संबंधित जवानों से अलग-अलग पूछताछ की गई और वाहन पर मिले गोली के निशानों की पड़ताल हुई, तो मामले की सच्चाई सामने आने लगी।अब यह पता लगाया जा रहा है कि फायरिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
महिला दारोगा पुष्पा कुमारी की भूमिका पर सवाल
इस मामले में उत्पाद विभाग की महिला दारोगा पुष्पा कुमारी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।पुलिस जांच के अनुसार, वह उस धावा दल का नेतृत्व कर रही थीं, जिसमें शामिल जवानों ने संदिग्ध वाहन का पीछा किया था।
आरोप है कि उनके निर्देश पर फायरिंग की गई और इसके बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने का प्रयास किया गया।जांच में यह भी सामने आया कि गोली लगने के बाद मामले की पूरी जानकारी तत्काल स्थानीय थाना या वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई थी।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गलत कहानी किसने तैयार की और उसे आगे बढ़ाने में किन लोगों की भूमिका रही।
साक्ष्य छिपाने के लिए गाड़ी पटना भेजने का आरोप
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिस स्कॉर्पियो में अजीत कुमार सवार थे, उसे जांच अधिकारियों के सामने तत्काल प्रस्तुत नहीं किया गया।आरोप है कि घटना के बाद वाहन को पटना भेज दिया गया था।
जब पुलिस ने गाड़ी की जांच की, तो उसमें पीछे की ओर से गोली लगने का निशान मिला। यह तथ्य शुरुआती मुठभेड़ की कहानी से मेल नहीं खाता था।पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वाहन की स्थिति और गोली के निशान घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।इस मामले में साक्ष्य छिपाने और जांच को गुमराह करने से संबंधित आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
महिला दारोगा समेत सात लोगों की गिरफ्तारी
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार शाम तक सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, महिला दारोगा पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।गिरफ्तार लोगों में उत्पाद विभाग के जवान, होमगार्ड से जुड़े कर्मी और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल बताए गए हैं।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किस व्यक्ति ने गोली चलाई, किसने फायरिंग का आदेश दिया और घटना के बाद किन लोगों ने वास्तविक जानकारी छिपाने में भूमिका निभाई।इस मामले में आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
राजगीर डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी की जांच
सिपाही की मौत के मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया है।राजगीर डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।टीम संबंधित जवानों के बयान, हथियार से जुड़े साक्ष्य, वाहनों की स्थिति और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है।इसके अलावा उस संदिग्ध पिकअप वैन की भी तलाश की जा रही है, जिसका उत्पाद विभाग की टीम पीछा कर रही थी।पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि शराब की खेप कहां से लाई जा रही थी और उसका परिवहन करने वालों की पहचान क्या थी।
नालंदा के नगरनौसा के रहने वाले थे अजीत कुमार
मृतक सिपाही अजीत कुमार नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र के नगमा गांव के रहने वाले थे।वह उत्पाद विभाग में सिपाही के पद पर कार्यरत थे और उनकी तैनाती पटना में थी।
ड्यूटी के दौरान गोली लगने से उनकी मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है।शुरुआत में परिवार और अधिकारियों को बताया गया था कि अजीत शराब तस्करों की फायरिंग का शिकार हुए हैं। लेकिन जांच में साथी जवान की गोली से मौत होने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने उत्पाद विभाग की छापेमारी और संदिग्ध वाहनों का पीछा करने के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।विशेष रूप से यह जांच का विषय है कि चलती गाड़ियों के बीच फायरिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या जवानों ने निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया था।इसके अलावा घटना की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को नहीं देने और कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने की कोशिश को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
नालंदा सिपाही अजीत कुमार की मौत का मामला अब केवल ड्यूटी के दौरान गोली लगने की घटना तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें कथित लापरवाही, गलत सूचना देने और साक्ष्य छिपाने जैसे गंभीर पहलू भी सामने आए हैं।पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि शराब तस्करों की गोली से सिपाही की मौत होने का शुरुआती दावा सही नहीं था।
अब एसआईटी घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और फायरिंग की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर रही है। अंतिम रूप से आपराधिक जिम्मेदारी न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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