पटना। बिहार पुलिस के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह विभाग ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने इस संबंध में आधिकारिक संकल्प जारी कर दिया। इस फैसले के बाद आदित्य कुमार के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) पद पर पदोन्नत होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, उनकी पदोन्नति को लेकर अलग से औपचारिक आदेश जारी होना अभी बाकी है।
आदित्य कुमार वर्तमान में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14 के समादेष्टा के पद पर कार्यरत हैं। लंबे समय से विवादों और विभागीय जांच का सामना कर रहे आईपीएस अधिकारी के लिए सरकार का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय कार्यवाही समाप्त होने से उनके सेवा संबंधी मामलों में एक बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हुई है।
बिहार गृह विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 अक्टूबर 2026 को जारी संकल्प संख्या 12411 में आदित्य कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही समाप्त किए जाने की पुष्टि की गई है।
गृह विभाग ने जारी किया आधिकारिक संकल्प
बिहार सरकार के गृह विभाग ने शुक्रवार को आदित्य कुमार से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी के खिलाफ लंबित विभागीय कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
इस आदेश के बाद पुलिस प्रशासनिक हलकों में उनके संभावित प्रमोशन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही किसी अधिकारी के करियर में पदोन्नति संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में कार्यवाही समाप्त होना उनके लिए बड़ी राहत है। हालांकि, पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा नियम, पात्रता और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी होना आवश्यक है।
डीआईजी बनने की संभावना हुई मजबूत
आदित्य कुमार वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनके बैच के कई अधिकारी पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में आदित्य कुमार की पदोन्नति का मामला लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जा रहा था।उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही समाप्त होने के बाद पदोन्नति संबंधी प्रस्ताव आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
डीआईजी का पद पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला होता है। इस स्तर के अधिकारियों को पुलिस रेंज, विशेष इकाइयों और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों की निगरानी सौंपी जा सकती है।यदि आदित्य कुमार को पदोन्नति मिलती है, तो उन्हें भविष्य में पुलिस संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। फिलहाल इस संबंध में अंतिम आदेश का इंतजार है।
गया में एसएसपी रहते हुए लगे थे गंभीर आरोप
आदित्य कुमार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का मामला उनके गया जिले में वरीय पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यकाल से जुड़ा था। आरोप था कि गया के फतेहपुर थाना क्षेत्र में शराब बरामदगी से संबंधित मामले में आवश्यक कार्रवाई और निगरानी में लापरवाही बरती गई।
उन पर अधीनस्थ थाना अधिकारियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखने और थानों के नियमित निरीक्षण से संबंधित जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन नहीं करने के भी आरोप लगाए गए थे।
इन आरोपों के आधार पर 12 जुलाई 2022 को विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी। आदित्य कुमार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। सितंबर 2022 में उन्होंने विभाग को अपना जवाब भी सौंपा था।
जांच रिपोर्ट में दो आरोप बताए गए थे प्रमाणित
विभागीय कार्यवाही के दौरान जनवरी 2023 में मुख्य जांच आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके बाद मामले में दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों की पड़ताल की गई।
31 अक्टूबर 2025 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें आदित्य कुमार के खिलाफ लगाए गए दो आरोप प्रमाणित बताए गए थे। अनुशासनिक प्राधिकार ने भी शुरुआत में जांच रिपोर्ट से सहमति जताई थी।
हालांकि, आदित्य कुमार ने विभागीय कार्रवाई और जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की पटना पीठ का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत आगे बढ़ा।
कैट के आदेश के बाद सरकार ने लिया फैसला
विभागीय कार्रवाई समाप्त करने के फैसले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यायाधिकरण ने 11 अगस्त 2026 को संबंधित विभागीय कार्यवाही और जांच रिपोर्ट को निरस्त करने का आदेश दिया था। साथ ही अधिकारी की पात्रता के अनुसार पदोन्नति और संबंधित सेवा लाभों पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश के संबंध में महाधिवक्ता की कानूनी राय ली। कानूनी सलाह के आधार पर न्यायाधिकरण के आदेश का अनुपालन करने का निर्णय लिया गया।इसी क्रम में गृह विभाग ने संबंधित विभागीय कार्यवाही समाप्त करने का संकल्प जारी किया।
पहले निलंबन से भी मिल चुकी है राहत
आदित्य कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के अलावा एक अन्य आपराधिक मामले के कारण भी प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी।अक्टूबर 2022 में आर्थिक अपराध इकाई की ओर से दर्ज एक प्राथमिकी के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। यह मामला तत्कालीन पुलिस महानिदेशक को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नाम पर कथित फर्जी फोन कॉल कराने के आरोपों से जुड़ा था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2025 में उन्हें निलंबन से राहत मिली थी। इसके बाद अब विभागीय कार्यवाही समाप्त होने से उनके लिए पदोन्नति की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। हालांकि, विभागीय कार्यवाही समाप्त होने का अर्थ अलग-अलग
आपराधिक
मामलों का स्वतः समाप्त होना नहीं है।
अब पदोन्नति के आदेश पर टिकी नजर
गृह विभाग का नया फैसला आदित्य कुमार के प्रशासनिक करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले विभागीय कार्यवाही और निलंबन से जुड़े विवादों के कारण उनकी सेवा संबंधी स्थिति प्रभावित हुई थी।अब संबंधित विभागीय कार्यवाही समाप्त होने के बाद उनकी पदोन्नति पर निर्णय लेने का रास्ता अधिक स्पष्ट हुआ है।
फिलहाल आदित्य कुमार बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14 में समादेष्टा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से डीआईजी पद पर पदोन्नति का आदेश जारी होने पर उनकी नई जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो सकेगी।
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