पटना। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की हवलदार प्रशिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच के दौरान परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और उत्तर कुंजी पहुंचाने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया है कि 29 जुलाई को आयोजित गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग की हवलदार प्रशिक्षक भर्ती परीक्षा समाप्त होने से करीब 40 मिनट पहले ही एक अभ्यर्थी के मोबाइल फोन पर उत्तर कुंजी पहुंच गई थी। आरोप है कि यह पूरा खेल बायोमेट्रिक कर्मियों की मदद से किया गया।
ईओयू ने इस मामले में पटना जिले के विक्रम थाना क्षेत्र के करसा निवासी अभ्यर्थी राज समदर्शी उर्फ राजा (25), वैशाली जिले के सदर थाना क्षेत्र के सैदपुर रजौली निवासी अभिषेक कुमार (21) और बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार (28) को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामले की जांच हाजीपुर नगर थाना कांड संख्या 368/2026 के आधार पर शुरू की गई थी। ईओयू को सूचना मिली थी कि 29 जुलाई को आयोजित हवलदार प्रशिक्षक भर्ती परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज की।
ईओयू के अनुसार, हाजीपुर के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र से बाहर निकल रहे अभ्यर्थी राज समदर्शी से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उसने परीक्षा में गड़बड़ी और अभिषेक कुमार की भूमिका के बारे में जानकारी दी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार की भूमिका सामने आई।
जांच में पता चला कि बायोमेट्रिक सुपरवाइजर के माध्यम से प्रश्नपत्रों के उत्तर राज समदर्शी तक पहुंचाए जा रहे थे। ईओयू ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की तो उनमें परीक्षा से जुड़े कई एडमिट कार्ड, उत्तर-पत्र और अन्य दस्तावेज मिले। जांच एजेंसी को एक उत्तर-पत्र ऐसा भी मिला, जो दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर भेजा गया था।
हवलदार प्रशिक्षक भर्ती परीक्षा का समय सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक निर्धारित था। ऐसे में परीक्षा समाप्त होने से पहले उत्तर-पत्र भेजे जाने की बात सामने आने के बाद मामले को गंभीर माना जा रहा है।
ईओयू की जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि राज समदर्शी और अन्य आरोपियों का इससे पहले आयोजित अप्रैल 2026 की एईडीओ परीक्षा में भी अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंध हो सकता है। हालांकि, इस मामले में अभी जांच जारी है और अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में वैशाली के 13 अन्य अभ्यर्थी भी जांच के घेरे में हैं। इन सभी का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ईओयू ने गिरफ्तार आरोपियों और अन्य नामजद लोगों के खिलाफ बिहार लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम, 2024 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और आर्थिक लाभ लेने वालों की पहचान के लिए जांच लगातार जारी है।
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में हवलदार प्रशिक्षक भर्ती परीक्षा में सामने आया यह मामला परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ईओयू अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।