काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। नेपाल के जनकपुरधाम और भारत के अयोध्याधाम के बीच प्रस्तावित विशेष यात्री ट्रेन सेवा को लेकर बुधवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू में उच्चस्तरीय राजनयिक बातचीत हुई। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के बीच हुई वार्ता के प्रमुख एजेंडे में दोनों देशों के बीच रेल संपर्क बढ़ाना, लंबित परियोजनाओं को गति देना और आगामी उच्चस्तरीय यात्राओं की तैयारियां शामिल रहीं। जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क को लेकर दोनों देशों में उत्साह है। इस सेवा के शुरू होने से माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर और भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के बीच यात्रियों का आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले विदेश सचिव स्तर की यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रेल, ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। जनकपुर-अयोध्या रेल सेवा को इन्हीं प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से जुड़ी तैयारियां
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नेपाल दौरा 4 और 5 नवंबर के लिए निर्धारित किया गया था। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करना और संभावित समझौतों की रूपरेखा तैयार करना है।नेपाल के प्रधानमंत्री के नवंबर के अंतिम सप्ताह में भारत आने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और समझौतों पर बातचीत हो सकती है।जनकपुरधाम से अयोध्याधाम तक विशेष ट्रेन सेवा शुरू करने की योजना भी इस प्रस्तावित यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। हालांकि, प्रधानमंत्री की यात्रा और रेल सेवा के उद्घाटन की अंतिम तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
दोनों देशों के प्रधानमंत्री दिखा सकते हैं हरी झंडी
जनकपुर-अयोध्या विशेष रेल सेवा को लेकर सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इसके संभावित उद्घाटन की है। नेपाल रेलवे कंपनी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से इस सेवा का शुभारंभ करने की योजना पर काम किया जा रहा है।नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की आगामी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शाह द्वारा विशेष ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाए जाने की संभावना है। इस संबंध में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी सामने आई है।हालांकि, दोनों प्रधानमंत्रियों की ओर से उद्घाटन कार्यक्रम की अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
जनकपुर और अयोध्या का धार्मिक महत्व
जनकपुरधाम को माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है, जबकि अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। दोनों धार्मिक नगरों का संबंध रामायण काल की परंपराओं से जुड़ा हुआ है।जनकपुर में स्थित जानकी मंदिर नेपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां भारत सहित विभिन्न देशों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है।ऐसे में दोनों धार्मिक नगरों को सीधे रेल सेवा से जोड़ना भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।इस सेवा के शुरू होने से श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में दोनों प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन करने में सुविधा मिल सकती है।
रेल सेवा शुरू करने के लिए तकनीकी तैयारियां तेज
भारत और नेपाल के रेलवे अधिकारियों के बीच जनकपुर-अयोध्या रेल सेवा के संचालन को लेकर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है।जून 2026 में काठमांडू में आयोजित दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों की संयुक्त बैठकों में जनकपुर-अयोध्या यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई थी।इन बैठकों में जयनगर-बिजलपुरा-बर्दिबास रेलवे परियोजना, जोगबनी-विराटनगर रेल संपर्क और रक्सौल-काठमांडू रेल परियोजना सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की भी समीक्षा की गई थी। इसकी जानकारी नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने साझा की थी।
जयनगर-जनकपुर रेलखंड का हो चुका निरीक्षण
प्रस्तावित रेल सेवा के संचालन से पहले दोनों देशों के रेलवे, सुरक्षा, सीमा शुल्क और आव्रजन विभागों के अधिकारियों ने जयनगर-जनकपुरधाम-कुर्था रेलखंड का संयुक्त निरीक्षण किया है।विशेष निरीक्षण ट्रेन के माध्यम से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई थी।अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा के संचालन के लिए यात्रियों की पहचान, सीमा शुल्क, सुरक्षा और आव्रजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का समन्वय आवश्यक होता है।इसी कारण दोनों देशों के अधिकारी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
रेल सेवा से धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
जनकपुर-अयोध्या ट्रेन सेवा शुरू होने से भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।वर्तमान में दोनों देशों के श्रद्धालु सड़क मार्ग और अन्य परिवहन साधनों के जरिए धार्मिक यात्राएं करते हैं। सीधे रेल संपर्क की सुविधा उपलब्ध होने पर यात्रियों के लिए यात्रा की योजना बनाना अधिक आसान हो सकता है।इससे अयोध्या, जनकपुर और रास्ते में पड़ने वाले क्षेत्रों में होटल, परिवहन, भोजनालय और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है।इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
किराया और समय सारिणी की घोषणा का इंतजार
हालांकि, प्रस्तावित जनकपुर-अयोध्या ट्रेन सेवा को लेकर कई तैयारियां आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन इसका अंतिम मार्ग, ठहराव, टिकट किराया और समय सारिणी अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।रेलवे अधिकारियों द्वारा इन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही यात्रियों के लिए बुकिंग और नियमित संचालन की विस्तृत जानकारी सामने आएगी।यात्रियों को फिलहाल आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
भारत-नेपाल संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के नागरिकों का एक-दूसरे के यहां आना-जाना सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।जनकपुर-अयोध्या रेल सेवा दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक नई उपलब्धि बन सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ आपसी सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।काठमांडू में विदेश सचिव स्तर की बातचीत के बाद अब दोनों देशों की निगाहें नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा पर टिकी हैं। यदि इस दौरान ट्रेन सेवा के उद्घाटन को मंजूरी मिलती है, तो माता सीता की नगरी जनकपुर और भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के बीच रेल संपर्क का नया अध्याय शुरू होगा।