भागलपुर। भागलपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती और दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार 22 अगस्त को सुबह जिन इलाकों में दूर तक मिट्टी और खेत नजर आ रहे थे, दोपहर बाद वहां गंगा की जलधारा दिखाई देने लगी। नदी के बढ़ते पानी के कारण खेतों में पानी फैलने लगा है और कई गांवों के मुहाने तक गंगा की धार पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों के बीच बाढ़ की आशंका और गहरी हो गई है।

शनिवार दोपहर दो बजे भागलपुर में गंगा का जलस्तर 32.85 मीटर दर्ज किया गया। नदी करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रही है। जलस्तर में इस तरह लगातार वृद्धि से प्रशासन और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निगाहें अब गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई हैं।

सुबह खेत, दोपहर में दिखने लगी गंगा की धार

गंगा के बढ़ते पानी का असर दियारा क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। सुबह तक जिन स्थानों पर मिट्टी और कृषि भूमि नजर आ रही थी, वहां कुछ ही घंटों बाद पानी फैल गया। खेतों में पानी प्रवेश करने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

दियारा क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चुनौतीपूर्ण है। खेतों में पानी बढ़ने से तैयार फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। वहीं, नदी का पानी अगर इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में इसका असर ग्रामीण बस्तियों पर भी पड़ सकता है।

फसल के साथ अब घर और पशुधन की चिंता

गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीणों की चिंता अब केवल फसल बचाने तक सीमित नहीं रह गई है। लोगों को अपने घर, पशुधन और रोजमर्रा की जरूरतों को सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है।

दियारा और तटवर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं। खेतों में पानी भरने के बाद पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराना भी मुश्किल हो सकता है। यदि पानी गांवों की ओर बढ़ता है तो लोगों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने और जरूरी सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

गांवों के मुहाने तक पहुंची नदी की धार

जलस्तर बढ़ने के कारण कई गांवों के मुहाने तक गंगा का पानी पहुंच गया है। नदी की धार अब उन क्षेत्रों में दिखाई देने लगी है, जहां कुछ समय पहले तक ग्रामीण खेती और दूसरे काम कर रहे थे।

ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे स्थिति को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। फिलहाल नदी का पानी गांवों के भीतर व्यापक स्तर पर प्रवेश नहीं किया है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण खतरा बना हुआ है।

डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर

शनिवार दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 32.85 मीटर दर्ज किया गया। नदी करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से ऊपर उठ रही है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए आने वाले घंटों में स्थिति पर नजर रखना जरूरी हो गया है।

नदी के जलस्तर में वृद्धि के कई स्थानीय प्रभाव सामने आने लगे हैं। सबसे पहले निचले इलाकों और खेतों में पानी पहुंचता है। इसके बाद नदी की धार गांवों की ओर बढ़ने लगती है। ऐसे में तटवर्ती और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है।

किसानों की बढ़ी चिंता

गंगा के बढ़ते पानी का सबसे पहला असर कृषि क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों को फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है। दियारा क्षेत्र की खेती में बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी होने पर नुकसान की आशंका भी बढ़ जाती है।

किसान अब अपनी फसल की स्थिति का जायजा लेने के साथ-साथ घर और पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी तैयारी करने लगे हैं। कई परिवार जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशासन की निगरानी जरूरी

बढ़ते जलस्तर के बीच तटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी और राहत तैयारियों की जरूरत बढ़ गई है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

ग्रामीण इलाकों में रास्तों, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बाढ़ का असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

फिलहाल गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी खेतों से होते हुए गांवों के मुहाने तक पहुंच चुका है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए नदी के किनारे जाने से बचना और प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी का पालन करना जरूरी है।

भागलपुर में शनिवार को गंगा का बढ़ता जलस्तर आने वाले दिनों की चुनौती का संकेत दे रहा है। 32.85 मीटर के जलस्तर और करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि ने तटवर्ती और दियारा क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को गहरा कर दिया है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि नदी का पानी किस गति से आगे बढ़ता है और आने वाले घंटों में स्थिति किस दिशा में जाती है।

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