भागलपुर। जिले के लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने और बाजार में बिकने वाली खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से करीब छह साल पहले उपलब्ध कराई गई 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' वैन अब चालक के अभाव में संचालन संबंधी परेशानी का सामना कर रही है। खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करने के लिए इस आधुनिक मोबाइल प्रयोगशाला की व्यवस्था की गई थी, लेकिन चालक के सेवानिवृत्त होने के बाद इसका नियमित संचालन प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। खास बात यह है कि वाहन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था मौजूद है, इसके बावजूद चालक नहीं होने के कारण जांच अभियान को सुचारू रूप से चलाना चुनौती बन गया है।
श्रावणी मेला सहित महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम लोग बाजारों में पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय से मोबाइल जांच वाहन के इस्तेमाल के निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन अब चालक की कमी के कारण इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन करना मुश्किल हो सकता है।
छह साल पहले मिली थी आधुनिक मोबाइल जांच प्रयोगशाला
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से करीब छह वर्ष पहले जिले को फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन उपलब्ध कराया गया था। इस वाहन का मुख्य उद्देश्य बाजारों, हाट-बाजारों, ग्रामीण क्षेत्रों और धार्मिक आयोजनों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच करना था।
वाहन में मोबाइल प्रयोगशाला की सुविधा होती है, जिसके माध्यम से दूध, तेल, मिठाई, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों में संभावित मिलावट की जांच की जा सकती है। इससे खाद्य सुरक्षा विभाग को अलग-अलग स्थानों पर जाकर नमूने लेने और लोगों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रति जागरूक करने में मदद मिलती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां नियमित खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की पहुंच सीमित है।
चालक के सेवानिवृत्त होने से संचालन पर संकट
मोबाइल जांच प्रयोगशाला के संचालन में तकनीशियन के साथ चालक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। तकनीशियन खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच करता है, जबकि चालक वाहन को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है।
जानकारी के अनुसार, वाहन के चालक के सेवानिवृत्त होने के बाद नियमित संचालन को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि तकनीशियन की व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन चालक नहीं होने से वाहन को जांच स्थलों तक पहुंचाने में कठिनाई हो सकती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच की सुविधा और तकनीशियन उपलब्ध हैं, तो चालक की वैकल्पिक व्यवस्था करके वाहन का नियमित उपयोग क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है।
श्रावणी मेले में विशेष रूप से रहती है वाहन की जरूरत
श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। इस अवधि में भोजनालयों, मिठाई की दुकानों, होटल, ढाबों और अस्थायी खाद्य स्टॉलों पर खाने-पीने की वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है।
श्रद्धालुओं और आम लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच जरूरी हो जाती है। इसी उद्देश्य से मुख्यालय की ओर से श्रावणी मेला और अन्य महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन का इस्तेमाल करने के निर्देश जारी किए जाते हैं।
त्योहारों के समय दूध, खोया, पनीर, मिठाई, खाद्य तेल और अन्य वस्तुओं की बिक्री बढ़ती है। ऐसे में गुणवत्ता की निगरानी और संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच का महत्व भी बढ़ जाता है।
मोबाइल जांच वाहन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा विभाग को जांच अभियान संचालित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
मौके पर जांच से मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने में मदद
फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके माध्यम से विभिन्न खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच मौके पर ही की जा सकती है।
सामान्य परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बाद जांच रिपोर्ट आने में समय लगता है। हालांकि मोबाइल जांच प्रयोगशाला में कई प्रकार की प्रारंभिक जांच तुरंत संभव होती है।
इससे संदिग्ध खाद्य पदार्थों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच शुरू करने में मदद मिलती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिकृत प्रयोगशाला से परीक्षण कराना जरूरी हो सकता है।
वाहन का नियमित संचालन खाद्य कारोबारियों को गुणवत्ता मानकों का पालन करने के लिए जागरूक करने में भी सहायक होता है।
ग्रामीण इलाकों में भी प्रभावित हो सकती है जांच व्यवस्था
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के बाजारों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी एक महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। कई बार छोटे बाजारों में खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में मोबाइल जांच वाहन उपयोगी साबित होता है। इसकी मदद से विभागीय टीम ग्रामीण बाजारों और दूरस्थ इलाकों तक पहुंच सकती है।
लेकिन वाहन के नियमित संचालन में बाधा आने पर इन क्षेत्रों में जांच अभियान प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी-दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कुछ प्रकार के हानिकारक रसायनों की मिलावट लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर सकती है।
इसलिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और समय पर परीक्षण बेहद जरूरी है।
देशभर में खाद्य सुरक्षा के लिए चलाई जा रही योजना
फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स योजना का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की जांच सुविधाओं को आम लोगों के करीब पहुंचाना है।
केंद्र सरकार की ओर से 10 फरवरी 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, देश के 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 305 फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल जांच प्रयोगशालाएं तैनात थीं।
इन वाहनों के माध्यम से खाद्य पदार्थों में सामान्य मिलावट की प्राथमिक जांच की जाती है। इसके अलावा लोगों को सुरक्षित भोजन, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया जाता है।
वैकल्पिक चालक की व्यवस्था करना जरूरी
जिले में खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए मोबाइल जांच वाहन का नियमित संचालन आवश्यक है। खासकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
ऐसे में संबंधित विभाग के सामने चालक की वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती है। स्थायी नियुक्ति या नियमानुसार अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
साथ ही वाहन के उपयोग के लिए नियमित कार्यक्रम तैयार करना भी जरूरी है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की जांच सुनिश्चित हो सके।
आम लोगों की सेहत से जुड़ा है मामला
मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
मोबाइल प्रयोगशाला की उपलब्धता के बावजूद चालक की कमी से उसका नियमित इस्तेमाल प्रभावित होना प्रशासनिक व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग चालक की समस्या का जल्द समाधान करे, ताकि करीब छह साल पहले उपलब्ध कराई गई यह सुविधा अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर सके।
इसके नियमित संचालन से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी और लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयासों में मदद मिलेगी।