राघोपुर। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने बिहार के राघोपुर प्रखंड में गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। प्रखंड की 20 पंचायतों के 75 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है।

बाढ़ के कारण क्षेत्र में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। लोगों की आवाजाही से लेकर बिजली, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों तक पर इसका असर पड़ा है। कई इलाकों में पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

राघोपुर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों और आसपास के इलाकों में प्रवेश कर गया है। इससे लोगों की सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, घरों में पानी घुसने के कारण खाद्य सामग्री और जरूरी सामान खत्म होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। लोगों को भोजन, पीने के पानी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की चिंता सताने लगी है।

कई परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुटे हुए हैं।

सड़कों पर चल रही नावें

बाढ़ की गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रखंड की मुख्य सड़कों और ग्रामीण मार्गों पर अब नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पानी भरने के कारण कई सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल से भी लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है। बाढ़ के पानी के कारण क्षेत्र में आवाजाही की समस्या बढ़ गई है।

बिजली आपूर्ति बंद

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिजली विभाग ने प्रखंड के सभी गांवों में विद्युत आपूर्ति बंद कर दी है।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया है, ताकि पानी के संपर्क में आने से किसी तरह की दुर्घटना न हो।

हालांकि, बिजली बंद होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। लोग मोबाइल चार्जिंग, रोशनी और अन्य जरूरी कामों के लिए भी परेशान हो रहे हैं।

स्कूलों को किया गया बंद

बाढ़ को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रखंड क्षेत्र के सभी विद्यालयों को बंद करने का आदेश जारी किया है।

प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल खोलना जोखिम भरा हो सकता है।

स्थिति सामान्य होने के बाद ही स्कूलों को दोबारा खोलने पर फैसला लिया जाएगा।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। लोगों को डर है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीण प्रशासन से राहत सामग्री, नावों की संख्या बढ़ाने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन की निगरानी जारी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।

अधिकारियों की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे सावधानी बरतें और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम न लें।

राहत व्यवस्था की जरूरत बढ़ी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती लोगों तक भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। पानी बढ़ने के साथ ही प्रशासन के सामने राहत पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई तो स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

गंगा के जलस्तर पर नजर

प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल राघोपुर प्रखंड में बाढ़ का असर गंभीर बना हुआ है। 20 पंचायतों के 75 से अधिक गांवों में रहने वाले लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। सड़क, बिजली और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने के बीच ग्रामीणों को अब राहत सहायता का इंतजार है।

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