रामनगर। रामनगर थाना क्षेत्र के चर्चित विजय कुमार सहनी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने हत्या, अपहरण, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों में मृतक विजय सहनी की बहन गीता देवी भी शामिल है, जिस पर अपने भाई की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। अदालत ने दोषियों पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
सजा पाने वालों में महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी शामिल हैं। मामला एक मई 2022 की शाम हुई घटना से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार गीता देवी ने षड्यंत्र के तहत अपने भाई विजय की हत्या कराई थी।
पांच दोषियों को आजीवन कारावास
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत में हत्या के साथ अपहरण, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों पर सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए गए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को सजा सुनाई।
एक लाख रुपये का अर्थदंड
अदालत ने आजीवन कारावास के साथ दोषियों पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। चर्चित हत्याकांड में सजा के ऐलान के साथ करीब चार साल पुरानी वारदात में न्यायिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची है।
मामला सामने आने के बाद से ही इलाके में इसकी काफी चर्चा रही थी। मृतक की बहन का ही हत्या की साजिश में आरोपी बनना मामले को और सनसनीखेज बनाता रहा।
1 मई 2022 की है घटना
अभियोजन के मुताबिक वारदात एक मई 2022 की शाम की है। इसी दिन विजय कुमार सहनी से जुड़ी घटना सामने आई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने के साथ कई लोगों की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और मामला अदालत तक पहुंचा।
इसके बाद अदालत में लंबी सुनवाई चली। अभियोजन ने आरोपियों की भूमिका साबित करने के लिए मामले से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत किए।
बहन पर भाई की हत्या की साजिश का आरोप
इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू मृतक विजय सहनी की बहन गीता देवी की भूमिका रही। अभियोजन पक्ष के अनुसार गीता देवी ने अपने ही भाई की हत्या के लिए षड्यंत्र रचा था।
अभियोजन का आरोप था कि इसी साजिश के तहत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया गया। अदालत में आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित पहलुओं को भी सुनवाई के दौरान रखा गया।
मामले में गीता देवी को अन्य चार आरोपियों के साथ दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
अपहरण और साक्ष्य छिपाने का भी मामला
यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं था। आरोपियों पर अपहरण और वारदात से जुड़े साक्ष्य छिपाने के आरोप भी लगाए गए थे।
किसी आपराधिक वारदात के बाद सबूत नष्ट करना या उन्हें छिपाने का प्रयास जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस तरह के आरोपों को भी कानून में गंभीर माना जाता है।
मामले में पुलिस जांच के बाद तैयार किए गए साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पुलिस जांच के बाद अदालत तक पहुंचा मामला
विजय सहनी की हत्या के बाद रामनगर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। हत्या के पीछे की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच की गई।
जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए गए और फिर अदालत में आरोपपत्र तथा अन्य दस्तावेज पेश किए गए।
इसके बाद गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पांचों को दोषी ठहराया गया।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्य
हत्या के मामलों में अभियोजन को आरोपियों के खिलाफ आरोपों को अदालत के सामने प्रमाणित करना होता है। इसके लिए गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और जांच में जुटाए गए अन्य प्रमाण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विजय सहनी हत्याकांड में भी अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
अदालत ने सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद दोषियों के खिलाफ सजा का फैसला सुनाया।
फैसले के बाद फिर चर्चा में हत्याकांड
करीब चार साल पुराने इस चर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
विशेष रूप से एक बहन को अपने भाई की हत्या के आपराधिक षड्यंत्र में दोषी ठहराया जाना मामले का सबसे गंभीर पहलू है। पांच लोगों को एक साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने से भी फैसले की चर्चा बढ़ गई है।
पांचों को मिली उम्रकैद
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने आखिरकार विजय कुमार सहनी हत्याकांड में महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
हत्या, अपहरण, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षड्यंत्र के इस मामले में अदालत ने अर्थदंड भी लगाया है। एक मई 2022 की शाम हुई वारदात के बाद शुरू हुई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है।