पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में वन विभाग, आरपीएफ और रेलवे कर्मियों की टीम ने एक चोटिल फिशिंग कैट (जंगली बिल्ली) का सफल रेस्क्यू किया। नरकटियागंज-बगहा रेलखंड के बीच मुख्य तिरहुत नहर पर बने रेलवे पुल संख्या-349 पर फंसी फिशिंग कैट को करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस रेस्क्यू अभियान के दौरान जंगली बिल्ली काफी आक्रामक हो गई और उसके हमले में वन विभाग के दो कर्मी घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे आसपास के ग्रामीणों ने रेलवे पुल पर एक जंगली बिल्ली को देखा। पुल पर चोटिल हालत में मौजूद फिशिंग कैट को देखकर ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। इसकी सूचना पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव ने तत्काल वन विभाग और बगहा रेलवे स्टेशन के अधिकारियों को दी।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेलवे कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया। फिशिंग कैट घायल होने के कारण ठीक से चल नहीं पा रही थी, लेकिन डर और दर्द के कारण वह काफी आक्रामक व्यवहार कर रही थी।
रेस्क्यू के दौरान जंगली बिल्ली ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें वन विभाग के दो कर्मचारी घायल हो गए। हालांकि, कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी और सुरक्षा उपायों के साथ अभियान को जारी रखा। करीब दो घंटे की मेहनत के बाद सुबह 7:25 बजे टीम ने फिशिंग कैट को सुरक्षित पकड़ लिया।
बताया जा रहा है कि यही फिशिंग कैट सोमवार देर शाम विकास वैभव चौराहे के पास भी दिखाई दी थी। इसकी सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी और देर रात करीब 11 बजे तक उसकी तलाश करती रही, लेकिन उस समय उसे पकड़ा नहीं जा सका था। संभावना जताई जा रही है कि रात के दौरान वह रेलवे पुल की ओर पहुंच गई थी।
रेस्क्यू के बाद फिशिंग कैट को वन विभाग ने अपने संरक्षण में लेकर पशु चिकित्सक से उसका इलाज कराया। जांच में उसके पैर में हल्की चोट के निशान मिले। चोट के कारण वह तेजी से भाग नहीं पा रही थी। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिशिंग कैट एक दुर्लभ जंगली जीव है और इसे संरक्षित प्रजातियों में शामिल किया जाता है। ऐसे जीवों के मानव आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाएं कई बार सामने आती रहती हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी जंगली जानवर को देखा जाए तो उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू अभियान के दौरान रेल परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा। पुल से गुजरने वाली ट्रेनों के समय फिशिंग कैट नीचे छिप जाती थी, जिससे ट्रेनों की आवाजाही सामान्य रही। रेलवे और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से एक दुर्लभ वन्यजीव को सुरक्षित बचाया जा सका।
वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार ने बताया कि घायल फिशिंग कैट का इलाज करने के बाद उसे प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और ऐसी घटनाओं में तुरंत कार्रवाई की जाती है।