बिहार : खरीफ फसल की तैयारी के बीच डंडई प्रखंड में खाद की समस्या किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के बावजूद किसानों को खाद की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन बाजार में खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर शिकायतें सामने आने लगी हैं। किसानों का आरोप है कि प्रखंड क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है, जिसके कारण उन्हें निर्धारित दर से अधिक कीमत देकर भी खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान इन दिनों खाद की व्यवस्था करने के लिए लगातार दुकानों और बाजारों का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है। अगर समय पर खाद की व्यवस्था नहीं हुई तो धान की रोपाई और फसल उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
खाद की तलाश में भटक रहे किसान
डंडई प्रखंड के कई गांवों के किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन शुरू होने के साथ ही खाद की मांग बढ़ गई है। किसान धान की खेती के लिए खेतों की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें यूरिया, डीएपी समेत अन्य उर्वरकों की जरूरत पड़ रही है। लेकिन कई जगहों पर खाद की उपलब्धता सीमित होने की बात सामने आ रही है।
किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर खाद की पर्याप्त आपूर्ति का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। कई किसान सुबह से ही खाद दुकानों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें या तो खाली हाथ लौटना पड़ रहा है या फिर अधिक कीमत चुकाकर खाद खरीदनी पड़ रही है।
कालाबाजारी का आरोप, जांच की मांग
किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ दुकानदार खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी कर रहे हैं। निर्धारित कीमत से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके पास अतिरिक्त पैसे खर्च करने की क्षमता नहीं होती।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद की दुकानों की जांच कराई जाए और यदि कोई अनियमितता मिलती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि खेती के समय में इस तरह की परेशानी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।
बारिश की कमी के बीच बढ़ी चिंता
इस बार खरीफ सीजन में अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान पहले ही परेशान हैं। कई किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों में नमी बन सके और धान की रोपाई का काम तेजी से शुरू किया जा सके। ऐसे समय में खाद की समस्या ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम और समय पर उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करती है। अगर खाद और बारिश दोनों समय पर नहीं मिले तो इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है।
कृषि विभाग से हस्तक्षेप की उम्मीद
किसानों ने कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि प्रखंड क्षेत्र में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही खाद बिक्री केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खरीफ फसल के शुरुआती चरण में खाद की सही मात्रा और समय पर उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। यदि किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिलता है तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
दुकानदारों पर भी निगरानी जरूरी
किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली खाद का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए खाद बिक्री केंद्रों पर नियमित निगरानी और स्टॉक की जांच जरूरी है। किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
वहीं, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की ओर से अभी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही समस्या का समाधान करेगा और खेती के इस महत्वपूर्ण समय में उन्हें राहत मिलेगी।
किसानों की उम्मीदें प्रशासन पर टिकीं
खरीफ सीजन किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। धान जैसी प्रमुख फसल के लिए खेत की तैयारी से लेकर रोपाई तक हर चरण में सही समय पर संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में खाद की कमी और कालाबाजारी की शिकायतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
अब किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि समय रहते खाद की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।