पटना। बिहार में रविवार को एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी के धरने पर बैठने का मामला सामने आया है। बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी और खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप की पत्नी पूजा सिंह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गईं। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे से जुड़े लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पत्नी का मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देना अपने आप में असामान्य घटना मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूजा सिंह रविवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचीं और वहां धरने पर बैठ गईं। हालांकि, उनके धरने की वास्तविक वजह और उनकी प्रमुख मांगों के संबंध में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके विरोध प्रदर्शन को किसी विशेष पारिवारिक विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई या अन्य मामले से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आईपीएस भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा सिंह के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है। पूजा सिंह ने अपने पति पर मानसिक प्रताड़ना और अपनी छह वर्षीय बेटी से दूर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह अपनी बेटी से मिलना चाहती हैं, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं दिया जा रहा है। इन्हीं शिकायतों को लेकर वह पहले भी पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों से मदद मांग चुकी हैं। हालांकि, पूजा सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले सितंबर 2026 में भी यह मामला चर्चा में आया था। उस समय पूजा सिंह खगड़िया स्थित पुलिस अधीक्षक के सरकारी आवास पर पहुंची थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें आवास में प्रवेश नहीं करने दिया गया और अपनी बेटी से भी मिलने से रोका गया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक महिला अपनी परेशानी बताते हुए मदद मांगती दिखाई दे रही थी। हालांकि, संबंधित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई थी।
मामला केवल बिहार तक सीमित नहीं रहा। सितंबर में पूजा सिंह राजस्थान के भरतपुर भी पहुंची थीं। वहां उन्होंने मथुरा गेट थाने में अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दी थी। उनका आरोप था कि उन्हें अपनी बेटी से अलग रखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पूजा पहले अपने ससुराल और फिर अन्य परिजनों के घर पहुंचीं, लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
पूजा सिंह ने मीडिया से बातचीत में अपनी शादी और पारिवारिक जीवन को लेकर भी कई बातें साझा की थीं। उनके अनुसार, वर्ष 2015 में उनकी मुलाकात भानु प्रताप सिंह से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने प्रेम विवाह किया। पूजा का दावा है कि शादी के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ पति की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान भी सहयोग किया।
भानु प्रताप सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद भारतीय पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 372वीं रैंक हासिल की थी। खगड़िया जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उनका नाम जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में दर्ज है।
इस विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 26 अक्टूबर को सामने आया था। पूजा सिंह ने बिहार राज्य महिला आयोग में अपने पति के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए महिला आयोग ने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से पूजा सिंह की सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने आईपीएस भानु प्रताप सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होने का समन भी भेजा था।
महिला आयोग की इस कार्रवाई के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया। आयोग के सामने शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारी का पक्ष आने के बाद ही आरोपों से जुड़े तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग के समन के जवाब में भानु प्रताप सिंह ने क्या पक्ष रखा है और मांगी गई रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई हुई है।
अब रविवार, 1 नवंबर को पूजा सिंह के मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने से मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट में भी उनके धरने की पुष्टि की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस प्रदर्शन पर किसी निर्णय या आश्वासन की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
पूरे घटनाक्रम में सबसे संवेदनशील पहलू दंपती की नाबालिग बेटी से जुड़ा विवाद है। पूजा सिंह का आरोप है कि उन्हें अपनी बच्ची से दूर रखा जा रहा है। हालांकि, बच्ची की देखरेख और मुलाकात संबंधी व्यवस्था के बारे में किसी सक्षम अदालत के आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा और उसके हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है।
पूजा सिंह के आरोपों को लेकर आईपीएस भानु प्रताप सिंह का विस्तृत सार्वजनिक जवाब भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्षों के बयान, महिला आयोग की कार्रवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मुख्यमंत्री आवास के बाहर पूजा सिंह का धरना बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी उनकी शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। महिला आयोग की कार्यवाही और दोनों पक्षों के बयान इस विवाद की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।