मुजफ्फरपुर। बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामलों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई की है। योजना एवं विकास विभाग में मुंगेर जिले में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के कई ठिकानों पर गुरुवार, 8 अक्टूबर को छापेमारी की गई। इस दौरान मुजफ्फरपुर के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 2F से करीब 50 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। तलाशी में कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और सोने-चांदी के गहने भी मिले हैं। नकदी की मात्रा अधिक होने के कारण नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगाई गई है। ईओयू की टीम फ्लैट में मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि अभियंता से जुड़े कुल पांच ठिकानों पर कार्रवाई चल रही है।

सुबह से राधिका अपार्टमेंट में चल रही तलाशी

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की टीम मुजफ्फरपुर के नया टोला इलाके में स्थित राधिका अपार्टमेंट पहुंची। टीम ने अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 2F में तलाशी अभियान शुरू किया।

यह फ्लैट कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास से संबंधित बताया जा रहा है। तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में नकदी और गहने मिले।

करीब 50 लाख रुपये नकद मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने रकम की गिनती शुरू कराई। नकदी अधिक होने के कारण मशीन मंगाने की आवश्यकता पड़ी।

टीम फ्लैट में रखे बैंक संबंधी दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। तलाशी पूरी होने के बाद ही बरामद नकदी और अन्य संपत्तियों का कुल विवरण स्पष्ट होगा।

पांच ठिकानों पर ईओयू की कार्रवाई

आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईओयू ने कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास से संबंधित पांच ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है।

इनमें मुजफ्फरपुर का नया टोला स्थित फ्लैट भी शामिल है। जांच एजेंसी अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध संपत्ति और वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य अभियंता की घोषित आय और उनके नाम अथवा उनसे जुड़े ठिकानों पर मिली संपत्तियों के बीच अंतर की जांच करना है।

फिलहाल अन्य ठिकानों से कितनी नकदी, आभूषण या संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

फ्लैट से मिले कई बैंक खाते और गहने

राधिका अपार्टमेंट स्थित फ्लैट की तलाशी के दौरान ईओयू को कई बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा गहनों की बरामदगी की भी जानकारी है।

अब जांच एजेंसी के सामने इन बैंक खातों और संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल करने की जिम्मेदारी है।

बैंक खातों में जमा रकम, वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच से संबंधित संपत्तियों की जानकारी सामने आ सकती है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बरामद गहनों का कुल वजन और मूल्य कितना है। बैंक खातों में कितनी धनराशि जमा है, इसकी भी पुष्टि होना बाकी है।

इसी तरह जब्त नकदी की अंतिम राशि आधिकारिक गिनती पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नोटों की गिनती के लिए मंगाई मशीन

छापेमारी के दौरान सबसे अधिक चर्चा फ्लैट से मिली नकदी की हो रही है। अधिकारियों को करीब 50 लाख रुपये नकद मिले हैं।

इतनी बड़ी रकम की गिनती करने के लिए मशीन मंगाई गई है। जांच दल बरामद रकम का हिसाब तैयार कर रहा है।

नकदी की गिनती पूरी होने के साथ यह भी जांच का विषय होगा कि रकम कहां से आई और उससे संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं।

आर्थिक अपराध इकाई को यह भी निर्धारित करना होगा कि नकदी और बरामद संपत्तियों का अभियंता की वैध आय से क्या संबंध है।

फिलहाल नकदी मिलने के आधार पर ही पूरी रकम को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता। इसका निर्धारण दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद होगा।

मुंगेर में पदस्थापित हैं नारद कुमार दास

नारद कुमार दास बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में उनकी पदस्थापना मुंगेर में बताई गई है।

उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने कार्रवाई शुरू की है।

सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारियों की संपत्ति की जांच के दौरान वेतन, अन्य वैध आय, निवेश और अर्जित संपत्तियों का विवरण महत्वपूर्ण होता है।

जांच एजेंसी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास करती है कि संबंधित अधिकारी की कुल संपत्ति उनकी ज्ञात आय के अनुरूप है या नहीं।

इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर ईओयू की नजर

बिहार में आर्थिक अपराध इकाई भ्रष्टाचार और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों से संबंधित मामलों में कार्रवाई करती है।

आय से अधिक संपत्ति की जांच में सरकारी अधिकारियों की ज्ञात आय, खर्च और अर्जित संपत्तियों का परीक्षण किया जाता है।

यदि जांच में ज्ञात वैध आय की तुलना में अधिक संपत्ति होने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनों के अनुसार आगे कार्रवाई की जा सकती है।

हाल के दिनों में आर्थिक अपराध इकाई ने राज्य में अन्य सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की है।

सितंबर के अंत में परिवहन विभाग के मोबाइल सब इंस्पेक्टर अमित कुमार गुप्ता से संबंधित ठिकानों पर भी ईओयू ने कार्रवाई की थी। उस मामले में करीब 1.49 करोड़ रुपये की कथित आय से अधिक संपत्ति को लेकर जांच शुरू की गई थी।

संपत्ति के दस्तावेजों की भी होगी जांच

नारद कुमार दास से जुड़े ठिकानों पर तलाशी के दौरान मिली नकदी के अलावा अन्य संपत्तियों का विवरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांच एजेंसी बरामद बैंक दस्तावेजों और आभूषणों से संबंधित जानकारी का परीक्षण करेगी।

यह पता लगाया जाएगा कि संपत्तियां कब अर्जित की गईं और उनके लिए वित्तीय स्रोत क्या थे।

हालांकि, किसी अचल संपत्ति, जमीन या अन्य निवेश की बरामदगी को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसलिए फिलहाल मुजफ्फरपुर के फ्लैट से मिली नकदी, बैंक संबंधी दस्तावेज और गहनों की बरामदगी की जानकारी ही सामने आई है।

अंतिम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी कुल संपत्ति

आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी जारी रहने के कारण इस मामले में बरामदगी का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है।

मुजफ्फरपुर के नया टोला स्थित फ्लैट से करीब 50 लाख रुपये नकद मिलने की सूचना है। इसके अलावा कई बैंक खातों और गहनों की जांच की जा रही है।

ईओयू की टीम अन्य ठिकानों पर भी तलाशी ले रही है। सभी स्थानों की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही कुल नकदी, गहनों और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक होने की उम्मीद है।

फिलहाल कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ जांच जारी है। उन्हें दोषी ठहराने या बरामद संपत्ति को अवैध घोषित करने के संबंध में कोई अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।

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