लीची बागों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर, तुड़ाई के बाद छंटाई और पोषण जरूरी: विशेषज्ञ सलाह
Bihar बिहार: लीची की तुड़ाई के बाद बागों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले वर्ष बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फल प्राप्त करने के लिए अभी से उचित देखभाल जरूरी है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पौध रोग एवं सूत्रकृमि विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंह ने लीची उत्पादक किसानों के लिए विस्तृत परामर्श जारी किया है। उन्होंने किसानों को बागों की छंटाई, संतुलित पोषण, नियमित सिंचाई और पौध संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तुड़ाई के बाद यदि लीची के पेड़ों की सही देखभाल की जाए तो अगले मौसम में बेहतर फूल और फलन की संभावना बढ़ जाती है। इस समय की गई छंटाई पौधों की संरचना को संतुलित करने में मदद करती है, जिससे उत्पादन क्षमता बेहतर होती है।
डॉ. सिंह ने बताया कि हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन का असर लीची उत्पादन पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। असामान्य गर्मी, लू, अनियमित वर्षा और तापमान में अचानक बदलाव के कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मौसमीय उतार-चढ़ाव से पौधों पर तनाव बढ़ता है, जिससे फलन प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से बागों का प्रबंधन करना अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक और संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें और समय-समय पर सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके साथ ही कीट और रोग नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि लीची के बागों में नियमित निगरानी और समय पर उपचार से उत्पादन में स्थिरता लाई जा सकती है। इससे किसानों की आय में भी सुधार होगा।
कुल मिलाकर, वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए लीची उत्पादन को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है और किसानों को मौसमी बदलावों को ध्यान में रखते हुए बागों की देखभाल करने की सलाह दी गई है।