बांका : आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दौर में भी अंधविश्वास और झाड़-फूंक पर भरोसा करने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। खासकर सर्पदंश के मामलों में समय पर उचित उपचार नहीं मिलना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला जमनी दुहबा गांव से सामने आया है, जहां सोमवार को सांप के काटने से 14 वर्षीय रोशन कुमार की मौत हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि किशोर को मृत घोषित किए जाने के बाद भी उसके परिजन उसे दोबारा जीवित होने की उम्मीद में तांत्रिक के पास ले गए। परिजनों को विश्वास था कि झाड़-फूंक के जरिए रोशन को बचाया जा सकता है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के प्रति जागरूकता, वैज्ञानिक उपचार और अंधविश्वास की समस्या को उजागर किया है।
सांप के काटने से 14 वर्षीय रोशन की मौत
मिली जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के जमनी दुहबा गांव में रहने वाला 14 वर्षीय रोशन कुमार सोमवार को सर्पदंश का शिकार हो गया।घटना के बाद किशोर की हालत बिगड़ने और उसकी मौत होने की जानकारी सामने आई है।रोशन की मौत से परिवार में मातम छा गया। कम उम्र में बेटे को खोने का सदमा परिजनों के लिए बेहद दर्दनाक था।हालांकि, रोशन को सांप ने किस समय और किस स्थान पर काटा था, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।इसी तरह सर्पदंश के बाद उसे किस अस्पताल में ले जाया गया और डॉक्टरों ने कब मृत घोषित किया, इसकी आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
मृत घोषित होने के बाद तांत्रिक के पास ले गए परिजन
घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रोशन को मृत घोषित किए जाने के बाद भी परिजन उसके जीवित होने की उम्मीद लगाए रहे।बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य किशोर को लेकर एक तांत्रिक के पास पहुंचे, जहां झाड़-फूंक के जरिए उसे दोबारा जीवित करने की उम्मीद की गई।परिजनों को विश्वास था कि किसी पारंपरिक प्रक्रिया से रोशन की स्थिति बदल सकती है।हालांकि, चिकित्सा विज्ञान में झाड़-फूंक या तांत्रिक क्रियाओं के जरिए सर्पदंश के विष को निष्क्रिय करने या चिकित्सकीय रूप से पुष्टि की गई मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति को पुनर्जीवित करने का कोई प्रमाण नहीं है।किसी की मृत्यु की पुष्टि और उपचार संबंधी निर्णय प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों द्वारा ही किए जाने चाहिए।
गांव में घटना को लेकर चर्चा
किशोर की मौत और उसके बाद परिजनों द्वारा तांत्रिक की मदद लेने की घटना ने अंधविश्वास के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग सांप के काटने को लेकर पुरानी मान्यताओं पर भरोसा करते हैं।कुछ स्थानों पर सर्पदंश होने के बाद लोगों को अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक कराने की परंपरा देखने को मिलती है।इस तरह की प्रथाओं के कारण जरूरी चिकित्सा उपचार में देरी हो सकती है।हालांकि, रोशन के मामले में इलाज शुरू होने में कितनी देरी हुई थी और मृत्यु से पहले कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए थे, यह स्पष्ट नहीं है।इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी मौत का कारण केवल झाड़-फूंक को ठहराना उचित नहीं होगा।
सर्पदंश के बाद हर मिनट हो सकता है महत्वपूर्ण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जहरीले सांप के काटने पर शरीर में कई प्रकार के गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।कुछ सांपों का विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।दूसरे प्रकार के विष से रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में गुर्दों को भी नुकसान पहुंच सकता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सर्पदंश के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं को कम करने के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है।समय पर उपचार मिलने से अनेक मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
झाड़-फूंक नहीं, एंटीवेनम है प्रभावी इलाज
सर्पदंश के मामले में सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपचार एंटीवेनम है।एंटीवेनम ऐसी दवा है, जिसका उपयोग शरीर में पहुंचे सांप के विष के प्रभाव को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है।हालांकि, हर सांप जहरीला नहीं होता और हर सर्पदंश के मरीज को एंटीवेनम की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।डॉक्टर मरीज के लक्षणों, शारीरिक जांच और आवश्यक परीक्षणों के आधार पर उपचार का फैसला करते हैं।गंभीर परिस्थितियों में मरीज को सांस लेने में सहायता, रक्तचाप नियंत्रित करने और अन्य अंगों की कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ सकती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन स्पष्ट करता है कि पारंपरिक उपचार, जड़ी-बूटियां और झाड़-फूंक एंटीवेनम का विकल्प नहीं हैं।
सर्पदंश होने पर क्या करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करनी चाहिए।पीड़ित व्यक्ति को अधिक चलने-फिरने से रोकना चाहिए। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे यथासंभव स्थिर रखें।यदि हाथ या पैर में अंगूठी, कड़ा या अन्य कसी हुई वस्तु हो, तो सूजन आने से पहले उसे सावधानीपूर्वक हटा देना चाहिए।मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना जरूरी है, जहां सर्पदंश के उपचार की सुविधा उपलब्ध हो।भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर और उपलब्ध क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवा के लिए 108 पर संपर्क किया जा सकता है।सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दोबारा काटने का खतरा रहता है।
इन गलतियों से जान को हो सकता है खतरा
सर्पदंश के बाद कुछ पारंपरिक घरेलू तरीके नुकसानदेह हो सकते हैं।घाव को चाकू से काटना, विष निकालने के लिए मुंह से चूसना, कसकर रस्सी बांधना या घाव पर रसायन और जड़ी-बूटी लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता।ऐसी गतिविधियों से चोट बढ़ सकती है और अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती हैकई बार लोग सांप के काटने के बाद शुरुआती लक्षण न दिखने पर इसे सामान्य घटना मान लेते हैं।लेकिन कुछ जहरीले सांपों के काटने के बाद गंभीर लक्षण देर से सामने आ सकते हैं।
इसलिए लक्षण न होने पर भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है सर्पदंशचिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों पर सांप के विष का प्रभाव वयस्कों की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है।इसका एक प्रमुख कारण बच्चों का अपेक्षाकृत कम शारीरिक वजन है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सर्पदंश का शिकार होने वाले बच्चों में गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का जोखिम अधिक हो सकता है।ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों, झाड़ियों, लकड़ी के ढेर और अंधेरे स्थानों के आसपास सांप मिलने की संभावना रहती है।ऐसे में बच्चों को इन स्थानों पर सावधानी बरतने की जानकारी देना आवश्यक है।
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
जमनी दुहबा गांव की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता सामने रखी है।कई परिवार सांप के काटने के बाद क्या करना चाहिए, इसकी सही जानकारी नहीं होने के कारण पारंपरिक तरीकों पर भरोसा कर लेते हैं।स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय सामाजिक संगठनों के माध्यम से लोगों को सर्पदंश के वैज्ञानिक उपचार के बारे में जागरूक किया जा सकता है।गांवों में यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि सांप के काटने पर सबसे पहला कदम अस्पताल पहुंचना होना चाहिए।इसके अलावा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों, आवश्यक दवाओं और मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
रोशन की मौत ने उठाए कई गंभीर सवाल
महज 14 वर्ष की उम्र में रोशन कुमार की मौत पूरे परिवार के लिए गहरी क्षति है।मृत घोषित किए जाने के बाद भी परिजनों द्वारा उसे तांत्रिक के पास ले जाने की घटना से स्पष्ट होता है कि बीमारी और मृत्यु को लेकर समाज के कुछ हिस्सों में अब भी अवैज्ञानिक मान्यताएं मौजूद हैं।हालांकि, इस मामले में मृतक के उपचार और मृत्यु से जुड़ी सभी परिस्थितियों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
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