पटना। गंगा जल संधि को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब तक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे हैं, लेकिन अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी केंद्र सरकार से बिहार के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि गंगा जल संधि और फरक्का समझौते से जुड़े सभी विषयों में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राज्य को पेयजल, किसानों की सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी के उपयोग का अधिकार मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिहार की नदियां और जल संसाधन राज्य की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर 2026 में अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने जा रही है।
पटना में गंगा जल संधि पर संगोष्ठी
शुक्रवार को पटना के चाणक्या होटल में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग की ओर से 'गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा' विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कलश में गंगा जल डालकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।संगोष्ठी में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, गंगा में गाद जमाव, बाढ़ नियंत्रण और बिहार की भविष्य की जल आवश्यकताओं पर चर्चा की गई।कार्यक्रम में जल विशेषज्ञों, अभियंताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बढ़ती आबादी, कृषि क्षेत्र और औद्योगिक विकास को देखते हुए जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने केंद्र सरकार से गंगा जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर बिहार की जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग की।
पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जरूरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के समग्र विकास के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।राज्य में बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई की बेहतर व्यवस्था जरूरी है।इसके अलावा बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पानी की मांग भी बढ़ रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को पेयजल, खेतों की सिंचाई और उद्योगों के संचालन के लिए पर्याप्त पानी के उपयोग का अधिकार मिलना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा जल संधि और फरक्का समझौते से संबंधित निर्णयों में बिहार की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।राज्य सरकार चाहती है कि गंगा के जल संसाधनों का उपयोग बिहार के विकास में अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।
दिसंबर में समाप्त होगी 30 साल पुरानी संधि
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि पर 12 दिसंबर 1996 को हस्ताक्षर किए गए थे।इस समझौते की अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई थी, जो दिसंबर 2026 में पूरी होने जा रही है।इस संधि के अंतर्गत फरक्का बैराज के पास गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था निर्धारित की गई थी।विशेष रूप से शुष्क मौसम में उपलब्ध पानी के वितरण को लेकर दोनों देशों के बीच प्रावधान तय किए गए थे।अब संधि की अवधि समाप्त होने से पहले भविष्य की जल बंटवारा व्यवस्था पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है।बिहार सरकार की मांग है कि किसी भी नए समझौते या मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा में राज्य की जल आवश्यकताओं का पर्याप्त ध्यान रखा जाए।हालांकि, संधि के नवीनीकरण या बदलाव पर अंतिम निर्णय भारत और बांग्लादेश की सरकारों के बीच होने वाली आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
जदयू पहले से उठाती रही है फरक्का का मुद्दा
गंगा जल संधि और फरक्का बैराज को लेकर जनता दल यूनाइटेड के नेता पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।पार्टी का तर्क रहा है कि गंगा के जल प्रबंधन और फरक्का बैराज से जुड़े प्रभावों के कारण बिहार को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।जदयू नेताओं ने विशेष रूप से गाद जमाव, बाढ़ और गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है।सितंबर 2026 में पार्टी ने गंगा किनारे स्थित बिहार के 12 जिलों में इस मुद्दे को लेकर अभियान भी चलाया था।जदयू का कहना है कि भविष्य की जल संधि में बिहार की जरूरतों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।हालांकि, फरक्का बैराज से जुड़ी पर्यावरणीय और जल प्रबंधन संबंधी समस्याओं के सभी कारणों का आकलन वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकता है।
सोन नदी जल बंटवारे पर भी बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच लगभग 25 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोग से किया गया है।मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत बिहार को सोन नदी का तीन-चौथाई पानी मिलेगा।उन्होंने इसे राज्य के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों का समाधान राज्यों के विकास और कृषि जरूरतों की पूर्ति के लिए आवश्यक है।हालांकि, सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित व्यवस्था अलग विषय है और इसे भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से अलग समझना चाहिए।
गंगा की गाद से सड़क निर्माण की तैयारी
सम्राट चौधरी ने गंगा सहित राज्य की अन्य नदियों में जमा गाद के प्रबंधन पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गाद प्रबंधन के लिए राज्यस्तरीय नीति बनाई है।इस नीति का उद्देश्य नदियों से निकलने वाली गाद का वैज्ञानिक तरीके से निष्कासन और उपयोग सुनिश्चित करना है।मुख्यमंत्री के अनुसार, गंगा की गाद और मिट्टी को आम लोगों के उपयोग के साथ सड़क तथा अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना है।इसके लिए बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के बीच भविष्य में समझौता किया जाएगा।उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी गाद प्रबंधन की ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई।गाद के उपयोग से पहले उसकी गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव और तकनीकी उपयुक्तता का परीक्षण आवश्यक होगा।
तटबंधों को मजबूत बनाने पर जोरमुख्यमंत्री ने गंगा नदी के तटबंधों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण को भी महत्वपूर्ण बताया।बिहार में हर साल कई क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या सामने आती है।ऐसे में नदी के प्रवाह, गाद जमाव और तटबंधों की स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी माना जाता है।सम्राट चौधरी ने कहा कि नदियों की वास्तविक स्थिति को समझकर ही प्रभावी योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।उन्होंने संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों के लिए गंगा का हवाई सर्वेक्षण कराने का सुझाव दिया।इससे नदी के प्रवाह, गाद की स्थिति और आसपास के क्षेत्रों का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सकेगा।हालांकि, खराब मौसम के कारण बक्सर से फरक्का तक गंगा के प्रस्तावित हवाई सर्वेक्षण को स्थगित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
जल संसाधनों से रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है।उन्होंने जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को इस लक्ष्य से जोड़ा।उनका कहना है कि नदियों का समुचित प्रबंधन कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मददगार हो सकता है।जल उपलब्धता बढ़ने से सिंचाई सुविधाओं और कृषि आधारित गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।इसी तरह उद्योगों के संचालन के लिए भी पर्याप्त पानी महत्वपूर्ण है।हालांकि, रोजगार सृजन से संबंधित यह सरकार का घोषित लक्ष्य है, जिसके परिणाम भविष्य की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
केंद्र के सामने पहले भी रखी गई है मांग
बिहार सरकार गंगा जल संधि को लेकर अपनी चिंताएं पहले भी केंद्र के सामने रख चुकी है।उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अक्टूबर में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि राज्य की जल आवश्यकताओं को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत की गई है।उनके अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित बिहार के प्रतिनिधियों ने अगस्त में केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी।इस दौरान गंगा जल संधि और बिहार की जरूरतों से संबंधित विषय उठाए गए थे।विजय कुमार चौधरी ने बताया था कि केंद्र की ओर से राज्य की चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन मिला है।अब बिहार सरकार चाहती है कि भविष्य की जल बंटवारा व्यवस्था में इन मुद्दों पर ठोस निर्णय हो।
गंगा जल संधि पर आगे क्या होगा?
दिसंबर 2026 में मौजूदा भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की निर्धारित अवधि पूरी होने वाली है।इससे पहले बिहार सरकार ने पेयजल, सिंचाई, उद्योग और गंगा के जल प्रबंधन से जुड़ी अपनी चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि बिहार के विकास के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना जरूरी है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राज्य की मांगों पर किस तरह विचार करती है और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय जल बंटवारा व्यवस्था में क्या प्रावधान सामने आते हैं।