चिराग पासवान ने उठाई गेस्ट प्रोफेसरों की मांग, स्थायी बहाली से पहले सेवा समायोजन की अपील
पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत गेस्ट प्रोफेसरों के हितों को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि स्थायी सहायक प्राध्यापकों की बहाली प्रक्रिया शुरू करने से पहले वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे गेस्ट प्रोफेसरों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उनके सेवा समायोजन पर विचार किया जाए।
चिराग पासवान ने अपने पत्र में बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में संस्थानों की स्वतंत्रता और कार्य व्यवस्था को बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लंबे समय से सेवा दे रहे गेस्ट प्रोफेसरों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्थायी सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम है, लेकिन इसके साथ ही वर्षों से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी के हितों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अचानक सेवा समाप्त होने से इन शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बहाली प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले गेस्ट प्रोफेसरों की स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने लंबे समय तक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अपनी सेवाएं दी हैं, उनके अनुभव और योगदान को देखते हुए सेवा समायोजन की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
बिहार के कई विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में गेस्ट प्रोफेसर लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ये शिक्षक नियमित नियुक्ति नहीं होने की स्थिति में छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को संभालते रहे हैं।
गेस्ट प्रोफेसरों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक कम वेतन और अस्थायी व्यवस्था के बावजूद उच्च शिक्षा व्यवस्था को चलाने में योगदान दिया है। ऐसे में स्थायी नियुक्तियों के समय उनके अनुभव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए उनकी स्वतंत्रता और शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखना जरूरी है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी नियुक्तियां उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लंबे समय से काम कर रहे अस्थायी शिक्षकों के भविष्य को लेकर संतुलित नीति बनाना भी जरूरी है।
गेस्ट प्रोफेसरों की समस्या बिहार में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। कई बार ये शिक्षक नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं। उनका तर्क है कि अनुभव और योग्यता के बावजूद उन्हें स्थायी शिक्षकों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।
चिराग पासवान की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को इसी दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उच्च शिक्षा में सुधार के साथ-साथ उन शिक्षकों के हितों को भी सुरक्षित रखा जाए, जिन्होंने वर्षों तक संस्थानों को अपनी सेवाएं दी हैं।
अब नजर राज्य सरकार के रुख पर है कि वह गेस्ट प्रोफेसरों के सेवा समायोजन की मांग पर क्या कदम उठाती है। यदि सरकार इस दिशा में कोई फैसला लेती है तो इससे हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।
बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमित शिक्षकों की नियुक्ति और अनुभवी गेस्ट प्रोफेसरों के अनुभव का उपयोग दोनों ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।