देव। प्रखंड के कंचनपुर थाना क्षेत्र के जंगल इलाके में मंगलवार शाम एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस की लूटी गई कारबाइन बरामद होने से सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई। संयुक्त टीम ने बंगला (एरौरा) पहाड़ी इलाके में अभियान चलाकर कारबाइन के साथ उसकी मैगजीन और स्प्रिंग भी बरामद की। हथियार बरामद होने के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
जिस पहाड़ी क्षेत्र से कारबाइन बरामद की गई है, वह इलाका पूर्व में माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में पुलिस के लूटे गए हथियार का जंगल क्षेत्र में मिलना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कारबाइन वहां तक कैसे पहुंची और इसे किसने छिपाकर रखा था।
गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को जंगल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों तथा हथियार छिपाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने कंचनपुर थाना क्षेत्र के जंगल में अभियान शुरू किया। टीम ने बंगला (एरौरा) पहाड़ी और आसपास के इलाके में बारीकी से तलाशी ली।
मंगलवार शाम तलाशी अभियान के दौरान पुलिस टीम को एक स्थान पर हथियार छिपाए जाने के संकेत मिले। जांच करने पर वहां से पुलिस की कारबाइन बरामद हुई। इसके साथ मैगजीन और स्प्रिंग भी मिली। पुलिस ने हथियार और अन्य सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
बरामद कारबाइन को पुलिस की लूटी हुई हथियार बताया जा रहा है। हालांकि, यह हथियार किस घटना के दौरान लूटा गया था और इसे कब जंगल में छिपाया गया, इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है क्षेत्र
बंगला (एरौरा) पहाड़ी और आसपास का जंगल क्षेत्र पहले माओवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहा है। घने जंगल और पहाड़ी भूभाग के कारण सुरक्षा बलों के लिए ऐसे इलाकों में अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण होता है। अतीत में इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों की मौजूदगी के कारण पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई बार अभियान चलाए हैं।
ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस का लूटा हुआ हथियार मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम सुराग माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार को किसी पुराने माओवादी नेटवर्क ने छिपाया था या हाल के समय में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि के तहत वहां रखा गया था।
आसपास के इलाके में तलाशी तेज
कारबाइन बरामद होने के बाद पुलिस और एसटीएफ ने आसपास के जंगल क्षेत्र में तलाशी अभियान को और तेज कर दिया है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इलाके में अन्य हथियार या आपत्तिजनक सामग्री तो छिपाकर नहीं रखी गई है।
जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में तलाशी के दौरान पुलिस संभावित ठिकानों, गुफानुमा स्थानों और झाड़ियों की भी जांच कर रही है। हथियार मिलने के बाद सुरक्षा बल किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बरामद हथियार से जुड़े लोगों का कोई नेटवर्क अब भी सक्रिय है या नहीं।
हथियार की जांच में जुटी पुलिस
बरामद कारबाइन, मैगजीन और स्प्रिंग को पुलिस ने सुरक्षित कब्जे में ले लिया है। अब हथियार की तकनीकी जांच और रिकॉर्ड के माध्यम से उसकी पहचान की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि कारबाइन किस पुलिस इकाई की थी और इसे किस समय तथा किस स्थान से लूटा गया था।
हथियार की बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि हथियार को जंगल में किस तरीके से पहुंचाया गया और इसे लंबे समय से वहां छिपाकर रखा गया था या हाल ही में ठिकाने लगाया गया।
सुरक्षा के लिहाज से अहम बरामदगी
पुलिस अधिकारियों के लिए यह बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लूटी गई कारबाइन जैसे हथियार का किसी संवेदनशील जंगल क्षेत्र से मिलना कई सवाल खड़े करता है। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल गंभीर आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। इसलिए पुलिस अब इसके स्रोत और संभावित उपयोग से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है।
संयुक्त अभियान में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की भागीदारी से यह भी स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील जंगल क्षेत्रों में गतिविधियों को लेकर सतर्क हैं। जंगल में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है।
फिलहाल कारबाइन, मैगजीन और स्प्रिंग की बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बंगला (एरौरा) पहाड़ी से मिले हथियार की पृष्ठभूमि और उससे जुड़े लोगों की पहचान के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही आसपास के जंगल में तलाशी अभियान जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि बरामद हथियार से जुड़े सुराग मिलने पर इस बात का पता चल सकेगा कि यह कारबाइन वहां कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।