CAG रिपोर्ट में बिहार PHED की पोल खुली, करोड़ों खर्च के बावजूद लोगों को नहीं मिला शुद्ध पेयजल

बिहार में पेयजल योजनाओं पर सवाल, CAG ने PHED की गंभीर अनियमितताओं का किया खुलासा

Update: 2026-07-25 02:19 GMT

Patna: बिहार में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पानी के लिए संघर्ष कर रही है। इस बीच भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में परियोजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में कई अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है।

रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष ने सरकार पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
CAG रिपोर्ट में क्या सामने आया?
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च किए जाने के बावजूद कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। कुछ योजनाएं अधूरी रहीं, जबकि कई स्थानों पर योजनाएं शुरू होने के बाद भी लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि परियोजनाओं की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध क्रियान्वयन में कमियां देखने को मिलीं, जिससे योजनाओं का अपेक्षित लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच सका।
करोड़ों रुपये खर्च, लेकिन लक्ष्य अधूरा
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया। पाइपलाइन बिछाने, जलापूर्ति केंद्र स्थापित करने और नई योजनाओं के निर्माण पर भारी राशि खर्च की गई।
इसके बावजूद कई क्षेत्रों में लोगों को आज भी—
स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा।
अनियमित जलापूर्ति की समस्या बनी हुई है।
कई योजनाएं पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रही हैं।
गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहरा जाता है।
परियोजनाओं में देरी
CAG रिपोर्ट में कई परियोजनाओं के तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं होने का भी उल्लेख किया गया है। समय पर कार्य पूरा न होने से परियोजनाओं की लागत बढ़ी और लाभार्थियों को समय पर सुविधा नहीं मिल सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बुनियादी ढांचा परियोजना में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल
रिपोर्ट में निर्माण कार्यों और जलापूर्ति व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन, जल टंकियों और अन्य संरचनाओं के रखरखाव में कमियां पाई गईं। इससे कई योजनाएं अपेक्षित क्षमता से काम नहीं कर सकीं।
निगरानी तंत्र कमजोर
CAG ने परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट के अनुसार—
कार्यों की नियमित समीक्षा पर्याप्त नहीं हुई।
कई मामलों में निरीक्षण समय पर नहीं किए गए।
प्रगति रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया।
जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रही।
आम लोगों पर असर
इन कमियों का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ा। कई गांवों में आज भी लोग हैंडपंप, कुएं या अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हैं।
स्वच्छ पेयजल की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब योजनाओं पर भारी राशि खर्च की गई, तो फिर लोगों को शुद्ध पानी क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से कहा गया है कि CAG रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदुओं का अध्ययन किया जाएगा। जिन मामलों में कमियां पाई गई हैं, वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे और भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय
जल प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता। योजनाओं की सफलता के लिए—
समयबद्ध क्रियान्वयन,
पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन,
नियमित निगरानी,
गुणवत्ता नियंत्रण,
और स्थानीय स्तर पर रखरखाव
जैसे पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
आगे क्या?
CAG की रिपोर्ट पर अब विधानसभा और संबंधित समितियों में चर्चा हो सकती है। रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों के आधार पर विभाग से जवाब मांगा जा सकता है और सुधारात्मक कार्रवाई की दिशा तय की जा सकती है।
यदि रिपोर्ट में उल्लिखित कमियों पर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो भविष्य में पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार और लोगों तक बेहतर जलापूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

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