बीजेपी सांसद विवेक ठाकुर का बयान: सांसदों को देश के किसी भी हिस्से में 50 लाख तक खर्च का अधिकार

Update: 2026-01-12 19:04 GMT
Bihar बिहार। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर ने सांसदों को मिलने वाले विकास कार्यों के अधिकारों को लेकर अहम जानकारी दी है। शेखपुरा में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नियमों के तहत सभी सांसदों को यह प्रावधान प्राप्त है कि वे देश के किसी भी हिस्से में अधिकतम 50 लाख रुपये तक की राशि विकास कार्यों के लिए आवंटित कर सकते हैं। विवेक ठाकुर ने कहा कि सांसद निधि (एमपी फंड) का उद्देश्य केवल अपने संसदीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर देश के अन्य हिस्सों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह नियमों के दायरे में है और इसका मकसद जरूरतमंद क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
अपने संसदीय अनुभव को साझा करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि राज्यसभा में रहते हुए उन्हें शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहराई से काम करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि वे दो बार संसदीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था, उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, शोध, और छात्रों से जुड़े अहम विषयों पर विस्तार से काम किया। विवेक ठाकुर ने कहा कि संसदीय समितियों में काम करने से नीतियों को नजदीक से समझने और जमीनी हकीकत से जोड़ने का अवसर मिलता है। शिक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देशभर के विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और विशेषज्ञों से संवाद किया, जिससे नीतिगत सुझाव सरकार तक पहुंचाए जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों की जिम्मेदारी केवल संसद में सवाल उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास कार्यों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कराना भी उतना ही जरूरी है। एमपी फंड के जरिए सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़े कई कार्य कराए जा सकते हैं, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलता है। भाजपा सांसद ने केंद्र सरकार की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दे रही है। सांसद निधि के उपयोग में भी नियमों का पालन अनिवार्य है और हर खर्च का लेखा-जोखा तय प्रक्रिया के तहत होता है।
विवेक ठाकुर ने यह भी कहा कि शिक्षा किसी भी देश की प्रगति की नींव होती है। इसलिए संसदीय स्तर पर शिक्षा से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा और ठोस फैसले बेहद जरूरी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में और सुधार होंगे, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। उनके इस बयान को सांसदों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें विकास और शिक्षा दोनों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
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