Bihar बिहार: बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने मोतिहारी की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह स्थान भारत के राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि राज कुमार शुक्ला का जिक्र होने के महज तीन दिन बाद वह मोतिहारी पहुंचेंगे। राज्यपाल ने कहा कि मीडिया में उस दिन राज कुमार शुक्ला को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद जब उन्होंने उनके बारे में जानकारी जुटाई और इतिहास को समझने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि मोतिहारी और चंपारण का देश के राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
राज कुमार शुक्ला का किया जिक्र
सैयद अता हसनैन ने राज कुमार शुक्ला के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने उनके बारे में शोध किया, तो उन्हें महसूस हुआ कि राष्ट्रीय आंदोलन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत इसी क्षेत्र से हुई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थान से बेहतर जगह उनके लिए कोई और नहीं हो सकती थी। राज्यपाल के बयान में चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की भी झलक देखने को मिली। मोतिहारी और चंपारण का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा हुआ है। राज कुमार शुक्ला ने किसानों की समस्याओं को महात्मा गांधी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके बाद गांधी चंपारण पहुंचे थे।
ऐतिहासिक विरासत को याद किया
राज्यपाल ने मोतिहारी पहुंचने के दौरान इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझने के लिए ऐसे स्थानों की भूमिका बेहद अहम है। चंपारण की धरती से जुड़े आंदोलन ने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राज्यपाल का यह बयान मोतिहारी की ऐतिहासिक पहचान और राष्ट्रीय आंदोलन में इसके योगदान को याद करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।