पटना। बिहार में महिलाओं के खिलाफ हाल के दिनों में सामने आई अपराध की घटनाओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान की ओर से कानून-व्यवस्था पर उठाए गए सवालों के बाद अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया दी है। मांझी ने कहा कि यदि चिराग पासवान सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें आगे की कार्रवाई करनी चाहिए। मांझी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है जब बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सत्ता पक्ष के भीतर भी अलग-अलग स्वर सुनाई दे रहे हैं।

चिराग पासवान ने हाल के दिनों में बिहार में महिलाओं और छात्राओं के साथ हुई घटनाओं को लेकर राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की थी। मंडार हिल पर एक युवती के साथ कथित उत्पीड़न के मामले में उन्होंने कहा था कि सरकार जवाबदेही से पीछे नहीं हट सकती। इससे पहले जमुई और समस्तीपुर में भी महिलाओं और किशोरियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले चर्चा में आए थे। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष के साथ-साथ एनडीए के कुछ नेताओं ने भी कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच चिराग पासवान का वह बयान फिर चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी की बात कही थी। हालांकि एक तथ्य-जांच रिपोर्ट के अनुसार यह बयान जुलाई 2025 का था और सितंबर 2026 की घटनाओं के संदर्भ में सोशल मीडिया पर फिर से प्रसारित हुआ। इस वजह से उनके पुराने और हाल के बयानों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई।

अब जीतन राम मांझी ने इस पूरे विवाद पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर चिराग पासवान वास्तव में सरकार का हिस्सा होने से शर्मिंदा हैं तो उन्हें आगे जो उचित लगे, वह कदम उठाना चाहिए। मांझी का बयान सीधे तौर पर चिराग पासवान की राजनीतिक स्थिति और एनडीए के भीतर उनकी भूमिका पर सवाल खड़ा करने वाला माना जा रहा है, हालांकि गठबंधन में किसी औपचारिक बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।

बिहार में कानून-व्यवस्था और विशेषकर महिला सुरक्षा का मुद्दा पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में है। जमुई में एक नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद मामला काफी गर्माया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां कीं और विशेष जांच टीम का गठन भी किया। इसके बाद समस्तीपुर और अन्य स्थानों से सामने आई घटनाओं ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया।

चिराग पासवान ने इन मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अपराधियों में कानून का डर बना रहे। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

सत्ता पक्ष के भीतर भी महिला सुरक्षा को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद शंभु शरण पटेल ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ अन्य नेताओं ने सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। एलजेपी (आर) की सांसद शांभवी चौधरी ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की समीक्षा की जरूरत बताई। इससे साफ है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि एनडीए के भीतर भी इस पर चर्चा हो रही है।

वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान के बयानों को आधार बनाते हुए एनडीए सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि जब सत्तारूढ़ गठबंधन के ही नेता कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार क्या कदम उठा रही है।

जीतन राम मांझी के बयान के बाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र केवल महिला सुरक्षा ही नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के रिश्ते भी बन गए हैं। चिराग पासवान केंद्र में मंत्री हैं और उनकी पार्टी एनडीए की सहयोगी है। ऐसे में राज्य सरकार के कामकाज को लेकर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

मांझी की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि गठबंधन में रहते हुए सहयोगी दल किस हद तक सरकार की आलोचना कर सकते हैं। एक ओर चिराग पासवान कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं मांझी ने उनसे अपने बयान के अनुरूप राजनीतिक कदम उठाने की बात कही है।

फिलहाल बिहार की राजनीति में महिला सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद सरकार पर कठोर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का दबाव बढ़ा है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बयानों ने इस मुद्दे को गठबंधन राजनीति से भी जोड़ दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चिराग पासवान मांझी की प्रतिक्रिया पर क्या जवाब देते हैं और एनडीए नेतृत्व इस पूरे विवाद को किस तरह संभालता है। फिलहाल दोनों नेताओं के बयानों ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

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